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Volkswagen में महाछंटनी: 1 लाख नौकरियों पर संकट, बंद होंगे 4 प्लांट्स

4 September 2026

AI News Reader

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Volkswagen में महाछंटनी: 1 लाख नौकरियों पर संकट, बंद होंगे 4 प्लांट्स
  • वैश्विक कार्यबल (Workforce) में 15% की होगी भारी कटौती; पहले से तय 50 हजार के अलावा 50 हजार और पद होंगे खत्म.
  • मॉडल पोर्टफोलियो आधा करेगी कंपनी, 2035 तक कारों के वैरिएंट्स में 75% तक कमी लाने का लक्ष्य.
  • भारत सहित 'ग्लोबल साउथ' के बाजारों पर बढ़ेगा फोकस, एक-तिहाई गैर-रणनीतिक संपत्तियां बेचेगी ऑटो दिग्गज.

मुंबई: वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में भारी उथल-पुथल के बीच जर्मनी की दिग्गज कार निर्माता कंपनी वोक्सवैगन समूह (Volkswagen Group) ने अब तक के सबसे बड़े पुनर्गठन (Restructuring) का ऐलान किया है। कंपनी ने उत्पादन लागत घटाने, गिरते मुनाफे को संभालने और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए इस दशक के अंत तक 1 लाख नौकरियों में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है।

कुल कार्यबल का 15% हिस्सा प्रभावित होगा

वोक्सवैगन समूह ने स्पष्ट किया कि पहले से प्रस्तावित 50,000 कर्मचारियों की छंटनी के अलावा अब 50,000 और अतिरिक्त पदों को समाप्त किया जाएगा। यह कुल कटौती समूह के वैश्विक कार्यबल का लगभग 15 प्रतिशत है।

वर्तमान में वोक्सवैगन समूह के पास दुनिया भर में 6.5 लाख से अधिक कर्मचारी हैं। इस समूह के अंतर्गत वोक्सवैगन के अलावा ऑडी, पोर्श, स्कोडा, लैम्बोर्गिनी, बेंटले, सीट (SEAT) और क्युप्रा जैसे दुनिया के नामी लग्जरी और मास-मार्केट ब्रांड्स शामिल हैं।

जर्मनी में 4 बड़े प्लांट्स बंद करने पर विचार, मॉडल होंगे आधे

कंपनी अपनी परिचालन लागत (Operating Cost) घटाने के लिए कठोर कदम उठा रही है:

प्लांट्स पर ताला: कंपनी अगले आठ वर्षों के भीतर जर्मनी में स्थित अपने चार प्रमुख उत्पादन संयंत्रों (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स) को बंद करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

मॉडल्स में कटौती: बाजार की मांग को देखते हुए वोक्सवैगन अपने कुल व्हीकल मॉडल पोर्टफोलियो को आधा (50%) करेगी।

75% तक घटेंगे वैरिएंट्स: कंपनी का लक्ष्य साल 2035 तक कारों के विभिन्न वेरिएंट्स और उनकी तकनीकी जटिलताओं को 75% तक कम करना है ताकि प्रोडक्शन लाइन को सरल बनाया जा सके।

कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा, "ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में तीव्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा, घटती मांग और तेजी से होते तकनीकी बदलावों को देखते हुए आर्थिक वास्तविकता के साथ अपने कार्यबल और उत्पादन क्षमता का तालमेल बिठाना अनिवार्य हो गया है।"

भारत और 'ग्लोबल साउथ' के लिए नई रणनीति

कंपनी ने वैश्विक बाजारों के लिए अपनी भौगोलिक रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है:

ग्लोबल साउथ (भारत, लैटिन अमेरिका व दक्षिण-पूर्व एशिया): चीन के घरेलू बाजार में मांग सुस्त होने के कारण कंपनी वहां के विशाल उत्पादन संयंत्रों का इस्तेमाल भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे 'ग्लोबल साउथ' के तेजी से बढ़ते बाजारों में कारों का निर्यात करने के लिए करेगी।

उत्तरी अमेरिका: अमेरिका और कनाडा जैसे बाजारों में कंपनी का पूरा ध्यान केवल सबसे अधिक मुनाफा देने वाले सेगमेंट्स (जैसे बड़ी लग्जरी एसयूवी) पर केंद्रित रहेगा।

33% गैर-रणनीतिक संपत्तियों को बेचेगी कंपनी

लागत बचाने और पूंजी को मुख्य ऑटोमोबाइल कारोबार में लगाने के लिए वोक्सवैगन अपनी कुल गैर-रणनीतिक संपत्तियों और रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में एक-तिहाई (33%) तक की कटौती करेगी। कंपनी केवल उन्हीं व्यवसायों को अपने पास रखेगी जो सीधे तौर पर उसके मुख्य ऑटोमोबाइल निर्माण और तकनीक को मजबूती प्रदान करते हैं। बाकी सभी गैर-जरूरी व्यवसायों को बेचकर नकदी जुटाई जाएगी।