उत्तराखंड में सियासी पारा हाई: सितंबर में राहुल, प्रियंका और खड़गे भरेंगे हुंकार; BJP ने कसा तंज

देहरादून:
उत्तराखंड में मानसून की फुहारों के बीच सियासी तापमान तेजी से चढ़ने लगा है। कभी धार्मिक मुद्दों तो कभी दलित और अल्पसंख्यक समीकरणों को लेकर राजनीतिक प्रयोगशाला बने इस पहाड़ी राज्य में अब राष्ट्रीय स्तर की चुनावी जंग तेज होने जा रही है। साल 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस इस बार बेहद आक्रामक रुख में नजर आ रही है और पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सितंबर महीने में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
मुख्य बिंदु:
- सितंबर में दिग्गजों का जमावड़ा: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उत्तराखंड के दौरे पर आ रहे हैं।
- 2027 का रोडमैप: उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े चुनावी राज्यों के साथ-साथ कांग्रेस उत्तराखंड में मजबूत संभावनाएं देख रही है।
- बीजेपी का पलटवार: "जब कांग्रेस के पास संगठन (सेना) ही नहीं है, तो सेनापति चुनाव कैसे जिताएंगे?"
देवभूमि पर कांग्रेस का विशेष फोकस
उत्तराखंड कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने शीर्ष नेतृत्व के दौरे की पुष्टि करते हुए बताया कि सितंबर महीने में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी राज्य के विभिन्न जनपदों का दौरा करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से इतने पहले केंद्रीय नेतृत्व की इस तरह की सक्रियता अमूमन कम ही देखने को मिलती है। इससे यह संकेत साफ है कि कांग्रेस उत्तराखंड को अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रख रही है।
"बिना सेना के सेनापति कैसे जिताएंगे चुनाव?" - BJP का तंज
कांग्रेस के इस मेगा प्लान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कांग्रेस के नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए कहा:
"राज्य में चाहे राहुल गांधी आएं, मल्लिकार्जुन खड़गे आएं या प्रियंका गांधी, इससे चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उत्तराखंड में कांग्रेस का संगठन पूरी तरह गायब है। जब कांग्रेस के पास सेना ही नहीं है, तो सेनापति कैसे चुनाव जितवा सकता है?"
राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना उत्तराखंड
पिछले कुछ समय में उत्तराखंड हिंदू-मुस्लिम मुद्दों और जातिगत राजनीति के कारण राष्ट्रीय फलक पर खासा चर्चा में रहा है। अब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के दौरों और दूसरी तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं की सक्रियता के चलते आने वाले दिनों में देवभूमि की धरती पर चुनावी जंग और तेज होगी, जिसकी गूंज देश की राजनीति में भी सुनाई देगी।
