RBI Repo Rate Hike: दिसंबर से शुरू हो सकता है दर बढ़ोतरी का नया चक्र, रेपो रेट 6% तक ले जाने का अनुमान

- नीतिगत ब्याज दर (Repo Rate) को मौजूदा 5.25% से बढ़ाकर 5.75% से 6.00% तक किए जाने का अनुमान.
- 25-25 बेसिस पॉइंट करके दो से तीन बार में दरें बढ़ा सकता है केंद्रीय बैंक.
- बैंकिंग सिस्टम में नकदी का अंबार: विदेशी फंड्स के भारी प्रवाह से सिस्टम में 14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है सरप्लस लिक्विडिटी.
नई दिल्ली: देश में तेज आर्थिक रफ्तार और महंगाई के दबाव के बीच होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) फिर से महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की एक ताजा शोध रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में जमा भारी अतिरिक्त नकदी (Excess Liquidity) को नियंत्रित करने और महंगाई को काबू में रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर 2026 से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया चक्र शुरू कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही तक आरबीआई अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को मौजूदा 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.75 से 6 प्रतिशत तक ले जा सकता है।
2 से 3 किस्तों में हो सकती है 0.75% तक की बढ़ोतरी
यूनियन बैंक का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक 25-25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की दर से दो से तीन बार में ब्याज दरों में वृद्धि करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत जीडीपी ग्रोथ, महंगाई का संभावित जोखिम और वैश्विक स्तर पर वित्तीय अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में बढ़ोतरी का विकल्प अब केंद्रीय बैंक की प्राथमिकताओं में फिर से शामिल हो गया है।
बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ा इतना पैसा?
इस संभावित सख्ती के पीछे मुख्य वजह देश में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी का आना है:
$136 अरब का विदेशी फंड: आरबीआई की एक विशेष योजना के तहत 31 अगस्त तक देश में लगभग 136 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा अनिवासी भारतीयों की विदेशी मुद्रा जमा (FCNR-B) के रूप में है।
लिक्विडिटी में भारी उछाल: इस डॉलर प्रवाह के कारण भारतीय बैंकों के पास नकदी तेजी से बढ़ी है। जून के मध्य में जो कोर लिक्विडिटी 4.82 लाख करोड़ रुपये थी, वह अगस्त मध्य तक बढ़कर 8.05 लाख करोड़ रुपये हो गई।
14 लाख करोड़ का अनुमान: 11 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी के 14.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बाजार में इस अत्यधिक नकदी को संभालना और महंगाई पर इसके असर को रोकना आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
लिक्विडिटी सोखने के लिए RBI उठाएगा तकनीकी कदम
यूनियन बैंक के अनुसार, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की आधिकारिक बैठक से पहले ही आरबीआई बाजार से अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए कुछ अंतरिम उपायों की घोषणा कर सकता है। इसके लिए केंद्रीय बैंक निम्नलिखित टूल्स का उपयोग कर सकता है:
वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR): बैंकों से अल्पकालिक नकदी सोखने की व्यवस्था।
इन्क्रीमेंटल कैश रिजर्व रेशियो (I-CRR): बैंकों की अतिरिक्त जमा पर अस्थायी रूप से अनिवार्य कैश रिजर्व लागू करना।
अक्टूबर में भी लग सकता है झटका: क्या हैं वैश्विक कारण?
यद्यपि रिपोर्ट में दरों में बढ़ोतरी का मुख्य अनुमान दिसंबर का लगाया गया है, लेकिन अक्टूबर में होने वाली एमपीसी बैठक में ही दरें बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो भारत में रुपये और आयात लागत पर दबाव बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में आरबीआई समय से पहले भी दरों में वृद्धि का कड़ा कदम उठा सकता है।
