केन्या सरकार के आरोपों पर टाटा केमिकल्स ने दी सफाई, कहा- कंपनी ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया

- केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो के देश छोड़ने के आदेश के बाद टाटा केमिकल्स का आधिकारिक बयान.
- कंपनी ने कहा- सरकार को सौंप दिए गए हैं सभी जरूरी दस्तावेज, हम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं.
- लंबित मुद्दों के समाधान के लिए केन्याई सरकार के साथ रचनात्मक बातचीत को तैयार है कंपनी.
नई दिल्ली: भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह टाटा की कंपनी टाटा केमिकल्स लिमिटेड (Tata Chemicals) ने केन्या में अपने कामकाज को लेकर उपजे विवाद पर स्थिति स्पष्ट की है। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कंपनी को 'मगाडी सोडा ऐश' प्लांट खाली करने का निर्देश दिया था, टाटा केमिकल्स ने कहा कि उसकी केन्याई इकाई देश के सभी विनियामक और कानूनी नियमों का पूरी तरह से पालन कर रही है।
स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी
टाटा केमिकल्स ने शेयर बाजार (Stock Exchange) को दी गई जानकारी में बताया कि उसकी अनुषंगी कंपनी 'टाटा केमिकल्स मगाडी लिमिटेड' (TCML) को केन्या के खनन, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री मामलों के मंत्रालय से 28 जुलाई को कामकाज रोकने (सस्पेंशन) का नोटिस मिला था।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि नोटिस के जवाब में उसने 11 अगस्त को ही सभी आवश्यक जानकारियां, रिपोर्ट और दस्तावेज मंत्रालय को सौंप दिए थे। कंपनी अब मंत्रालय द्वारा इन दस्तावेजों की समीक्षा और आगे के आधिकारिक निर्देशों का इंतजार कर रही है।
'हम कानून का सम्मान करते हैं और बातचीत को तैयार हैं'
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
"हम केन्या सरकार के अधिकारों और संप्रभुता का पूरा सम्मान करते हैं। कंपनी सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए स्थापित कानूनी और विनियामक माध्यमों से रचनात्मक बातचीत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी प्राथमिकता स्थानीय मगाडी समुदाय, कर्मचारियों के हितों की रक्षा और केन्या के निरंतर आर्थिक विकास में योगदान देना है।"
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब गहराया जब केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने काजियाडो काउंटी में एक जनसभा के दौरान टाटा केमिकल्स पर स्थानीय विकास न करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रपति रूटो ने कहा था कि टाटा यहां से प्राकृतिक संसाधन ले जाती है, लेकिन उसने स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उद्योग नहीं लगाए। उन्होंने टाटा को लेक मगाडी साइट से "सामान समेटकर जाने" का निर्देश देते हुए कहा था कि सरकार इस माइनिंग राइट के लिए नए निवेशकों को लाएगी। वहीं स्थानीय प्रशासन का दावा था कि कंपनी की लीज अवधि 2023 में ही समाप्त हो चुकी है।
क्यों अहम है मगाडी सोडा ऐश प्लांट?
2005 से टाटा के पास: टाटा केमिकल्स ने वर्ष 2005 में ब्रूनर मोंड लिमिटेड के अधिग्रहण के जरिए इस प्लांट का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था।
वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, केन्या प्राकृतिक सोडा ऐश का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग एक प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है।
औद्योगिक उपयोग: सोडा ऐश (सोडियम कार्बोनेट) का उपयोग बड़े पैमाने पर कांच (Glass) निर्माण, डिटर्जेंट और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरियों के निर्माण में किया जाता है।
