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क्या शुक्र ने निगल लिया था अपना ही चंद्रमा, नए अध्ययन में सामने आई हैरान करने वाली संभावना

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom21 September 2026

AI News Reader

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क्या शुक्र ने निगल लिया था अपना ही चंद्रमा, नए अध्ययन में सामने आई हैरान करने वाली संभावना

पृथ्वी का जुड़वां कहा जाने वाला शुक्र ग्रह आज बिना किसी चंद्रमा के है। एक नए अध्ययन में यह संभावना जताई गई है कि अतीत में उसका कोई चंद्रमा रहा हो सकता है, जो धीरे-धीरे ग्रह की ओर खिंचता गया और अंततः उससे टकरा गया। अध्ययन के अनुसार इसके लिए किसी बाहरी टक्कर या किसी बड़ी आपदा की जरूरत नहीं थी।

यह अध्ययन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड के खगोल वैज्ञानिक स्टीफन केन ने किया है। इसे द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

घूमने की रफ्तार ने तय किया अंजाम

पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। इस तेज घूर्णन के कारण ऊर्जा बाहर की ओर स्थानांतरित होती है और चंद्रमा हर साल करीब चार सेंटीमीटर दूर खिसकता जा रहा है। यह दूरी अपोलो अभियान के दौरान चंद्रमा पर छोड़े गए दर्पणों की मदद से नापी जाती है।

शुक्र के साथ स्थिति उलटी है। वह अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में पृथ्वी के 243 दिन लेता है। इतनी धीमी गति में ज्वारीय बल चंद्रमा को दूर धकेलने के बजाय अंदर की ओर खींचता है। नतीजा यह होता कि चंद्रमा धीरे-धीरे नीचे आता जाता और आखिरकार ग्रह से टकरा जाता।

अध्ययन में क्या किया गया

शोध की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

  • पहले मॉडल को पृथ्वी और चंद्रमा की मौजूदा व्यवस्था पर परखा गया
  • इसके बाद शुक्र की घूर्णन गति और काल्पनिक चंद्रमा के द्रव्यमान को बदलकर गणना की गई
  • काल्पनिक चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी के चंद्रमा के आधे से लेकर दस गुना तक रखा गया
  • भारी चंद्रमा तुलनात्मक रूप से तेजी से गिरते पाए गए

शुक्र की सतह का करीब अस्सी प्रतिशत हिस्सा लगभग एक ही उम्र का है, जिसे करीब एक अरब साल पहले हुई किसी बड़ी सतही पुनर्रचना से जोड़ा जाता है।

अभी क्या अनिश्चित है

यह अब भी तय नहीं है कि शुक्र का कभी कोई चंद्रमा था भी या नहीं। शोधकर्ता के अनुसार अगर ऐसी टक्कर हुई भी होगी, तो उसके सतही निशान समय के साथ मिट चुके होंगे। इसका पता लगाने के लिए ग्रह के भीतरी हिस्से का भूकंपीय अध्ययन मददगार हो सकता है।

केन ने कहा कि मेरा अध्ययन दिखाता है कि शुक्र को आज जैसी स्थिति तक पहुंचने के लिए किसी आपदा की जरूरत नहीं थी। नतीजों पर उन्होंने कहा कि जब मैंने यह पाया तो मैं हैरान रह गया।

जीवन के लिए चंद्रमा कितना जरूरी है, इस पर भी उनकी राय स्पष्ट है। उनके अनुसार चंद्रमा होने के लाभ तो हैं, लेकिन जीवन के लिए उसका होना अनिवार्य नहीं लगता।