ऑस्ट्रेलिया के सूखे मैदान के नीचे छिपी गुफाओं का पता चला, मंगल पर जीवन खोजने में मिल सकती है मदद

ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी हिस्से में फैला नलार्बर मैदान दुनिया के सबसे बड़े चूना पत्थर क्षेत्रों में गिना जाता है। दो लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैले इस सूखे मैदान के नीचे गुफाओं का विशाल जाल मौजूद है। एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि सतह पर दिखने वाले कुछ मामूली निशान असल में इन्हीं गहरी गुफाओं का संकेत हैं।
यह मैदान करीब एक करोड़ चालीस लाख साल पहले बना था, जब यहां मौजूद उथला समुद्र पीछे हट गया। इसके बाद यह इलाका धीरे-धीरे शुष्क होता चला गया। इस मैदान के दक्षिणी किनारे पर मिर्निंग समुदाय के लोग हजारों वर्षों से रहते आए हैं।
सीधी लकीरों का रहस्य
मैदान पर उत्तर से दक्षिण की ओर जाती कुछ उथली खाइयां हैं, जिनकी लंबाई बीस किलोमीटर तक है और गहराई कुछ ही मीटर। जमीन पर खड़े होकर इन्हें पहचानना लगभग असंभव है, लेकिन उपग्रह से बने डिजिटल मॉडल में ये साफ दिखती हैं।
इन खाइयों को लेकर पहले माना जाता था कि ये नदियों से बनी होंगी, लेकिन कई बातें इस धारणा से मेल नहीं खातीं:
- ये अचानक शुरू होती हैं और अचानक खत्म हो जाती हैं
- किसी जल निकासी तंत्र से जुड़ी हुई नहीं हैं
- इनमें नदियों जैसी शाखाएं नहीं बनतीं
- इनकी तलछट में पानी से जमाव के कोई चिह्न नहीं मिले
जमीन के भीतर झांककर मिला जवाब
शोध दल ने ड्रोन और हवाई तस्वीरों की मदद से इन खाइयों का नक्शा बनाया। साथ ही बोरहोल और गुफाओं के भीतर मिट्टी तथा चट्टान की परतें नापी गईं। इसके अलावा भूभौतिकीय तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो कुछ हद तक जमीन के भीतर का एक्स-रे लेने जैसी होती हैं।
जांच में पाया गया कि ये खाइयां टूटी हुई चट्टानों के गहरे क्षेत्रों के ठीक ऊपर स्थित हैं और कई जगह ज्ञात गुफाओं तथा सिंकहोल से मेल खाती हैं। निष्कर्ष यह निकला कि लाखों वर्षों में गुफाएं ऊपर की ओर धंसती गईं और उनका असर सतह तक पहुंच गया। यह अध्ययन कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ है।
मंगल से क्या रिश्ता
गुफाएं अंतरिक्ष से आने वाले विकिरण से बचाव देती हैं और उनके भीतर तापमान स्थिर रहता है। इसी वजह से इन्हें दूसरे ग्रहों पर जीवन खोजने के लिए उपयुक्त जगह माना जाता है। मंगल की सतह के नक्शों में भी कुछ संभावित गुफाएं चिह्नित की गई हैं।
नलार्बर की खूबी यह है कि यहां सक्रिय जल चक्र नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे मंगल पर नहीं है। इसलिए यहां विकसित की गई तकनीक वहां भी काम आ सकती है।
धरती पर कार्स्ट भूभाग कुल बर्फ रहित सतह का करीब पंद्रह प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं और दुनिया की दस से पच्चीस प्रतिशत आबादी को पानी पहुंचाते हैं। नलार्बर की गुफाओं में एक ऐसा ततैया भी मिला है जिसकी आंखें नहीं होतीं।
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