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बर्फीले चंद्रमाओं का रहस्य: महाटक्कर न तो महासागर बनाती है, न मिटाती है — नए अध्ययन में खुलासा

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom19 September 2026

AI News Reader

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बर्फीले चंद्रमाओं का रहस्य: महाटक्कर न तो महासागर बनाती है, न मिटाती है — नए अध्ययन में खुलासा

वाशिंगटन। सौरमंडल के बर्फीले चंद्रमाओं की सतह के नीचे छिपे महासागरों को लेकर एक नया अध्ययन सामने आया है। इसके अनुसार इन चंद्रमाओं पर हुई भीषण टक्करें न तो नया महासागर बनाती हैं और न ही मौजूदा महासागर को मिटाती हैं। यानी टक्कर से पहले जहां महासागर था, वहां टक्कर के बाद भी महासागर रहने की संभावना बनी रहती है।

यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के नेतृत्व में किया गया। इसके प्रमुख लेखक खगोल विज्ञान विभाग के सहयोगी शोध वैज्ञानिक मार्क नेव्यू हैं। अध्ययन में कोलोराडो स्थित साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और इजरायल के वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिक भी शामिल रहे। नतीजे 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

दो तरह के मॉडल जोड़कर हुई पड़ताल

शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग तरह के कंप्यूटर मॉडल को आपस में जोड़ा। पहला मॉडल टक्कर के भौतिक विज्ञान पर आधारित था, जो बर्फ और चट्टान के लाखों टुकड़ों की गति पर नजर रखता है — ये टुकड़े कैसे टूटते हैं, गर्म होते हैं और फिर से आपस में जुड़ते हैं। दूसरा मॉडल लंबी अवधि में तापीय बदलाव का आकलन करता है।

इनकी मदद से करीब 500 किलोमीटर और करीब 1,000 किलोमीटर त्रिज्या वाले दो आकार के चंद्रमाओं का अध्ययन किया गया। इन पर छोटे पिंडों की टक्कर, उनका बिखरना और दोबारा जुड़ना दिखाया गया, और उसके बाद साढ़े चार अरब वर्ष तक उनकी स्थिति का आकलन किया गया।

बड़े और छोटे चंद्रमाओं पर अलग-अलग असर

नतीजों के अनुसार बड़े चंद्रमाओं पर टक्कर की ऊर्जा से इतनी गर्मी पैदा होती है कि पहले से मौजूद महासागर करीब दो अरब वर्ष तक और मोटा हो सकता है। छोटे चंद्रमाओं में स्थिति उलट है। टक्कर से पहले उनकी बाहरी परत में बर्फ और चट्टान मिली हुई होती है, जो कंबल की तरह गर्मी को भीतर रोके रखती है।

टक्कर के बाद जब ये चंद्रमा दोबारा जुड़ते हैं, तो चट्टान केंद्र में बैठ जाती है और बर्फ ऊपर आ जाती है। इससे वह कंबल जैसी परत खत्म हो जाती है और महासागर को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि किसी भी टक्कर ने ऐसे चंद्रमा में महासागर नहीं बनाया जो अन्यथा जमा हुआ रहता। शोधकर्ताओं के अनुसार जिन टक्करों का अनुकरण किया गया, वे जानबूझकर सबसे बड़ी संभव टक्करें थीं।

अध्ययन में शनि के मिमास, एन्सेलेडस, टेथिस, डायोनी और रीया, यूरेनस के मिरांडा, एरियल, अंब्रिएल, टाइटेनिया और ओबेरॉन तथा नेप्च्यून के ट्राइटन का उल्लेख है। इनमें रीया को खास माना गया, जहां पुराने गड्ढे असामान्य रूप से चिकने हैं। नेव्यू के अनुसार यह संकेत देता है कि गर्मी नीचे से आई थी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये नतीजे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की प्राथमिकता तय करने और उपकरणों के डिजाइन में मदद करेंगे। महासागर की तलाश में गुरुत्वीय संकेतों, नमक के जमाव और बर्फीले ज्वालामुखियों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।