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चंद्रमा पर बना 222 मीटर चौड़ा नया गड्ढा, वैज्ञानिकों ने रखा मैकगेटचिन नाम

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom20 September 2026

AI News Reader

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चंद्रमा पर बना 222 मीटर चौड़ा नया गड्ढा, वैज्ञानिकों ने रखा मैकगेटचिन नाम

वाशिंगटन। चंद्रमा की सतह पर हाल के वर्षों में बना एक बड़ा नया गड्ढा वैज्ञानिकों के सामने आया है। यह गड्ढा करीब 222 मीटर चौड़ा और 43 मीटर गहरा है। इसे मैकगेटचिन नाम दिया गया है।

अध्ययन के मुताबिक यह टक्कर अप्रैल और मई 2024 के बीच किसी समय हुई। चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर के वाइड एंगल कैमरे से ली गई तुलनात्मक तस्वीरों में वर्ष 2025 की गर्मियों के आखिर में इसे पहली बार पहचाना गया।

पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना से खुला राज

वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह की तस्वीरें अलग-अलग समय पर लेकर उनकी आपस में तुलना करते हैं। इसी तरीके से नई बनी संरचनाओं, भूस्खलन और सतह की दरारों का पता चलता है। यहां भी टक्कर से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना ने इस गड्ढे को उजागर किया।

पहचान के बाद नैरो एंगल कैमरों से इसकी विस्तृत और त्रिविमीय तस्वीरें ली गईं तथा सतह का मॉडल तैयार किया गया। इससे गड्ढे की गहराई, ढाल और किनारे की ऊंचाई नापी जा सकी।

कैसा है यह गड्ढा

  • औसत चौड़ाई करीब 222 मीटर
  • गहराई करीब 43 मीटर
  • दीवारों का औसत ढाल 24 डिग्री, कहीं-कहीं लगभग 40 डिग्री तक
  • किनारा आसपास की सतह से करीब आठ मीटर ऊंचा

एक सदी में एक बार जैसी घटना

आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इतने बड़े आकार का गड्ढा औसतन हर 132 साल में एक बार बनता है। यही वजह है कि इसे जीवन में एक बार दिखने वाली घटना बताया गया है। नया गड्ढा एक ऐसे इलाके में बना है जहां समतल मैदानी सतह और ऊंचे भूभाग की सीमा मिलती है।

इस गड्ढे का नाम अपोलो काल के वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया है। शोध दल के अनुरोध पर अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ ने इस नाम को मंजूरी दी।

नई टक्करों का अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि इससे पता चलता है कि चंद्रमा पर उल्कापिंड किस रफ्तार और कितने अंतराल पर गिरते हैं। यह जानकारी भविष्य के चंद्र मिशनों और वहां बनने वाले ठिकानों की सुरक्षा योजना के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।