तनाव घटाने के लिए दिन में चंद सेकंड काफी, जानिए पांच छोटी आदतें जिन पर हुआ है शोध

तनाव कम करने के लिए लंबी छुट्टी या घंटों का अभ्यास जरूरी नहीं है। शोध बताते हैं कि दिन में कुछ सेकंड की छोटी-छोटी आदतें भी शरीर और मन पर असर डालती हैं। ऐसी पांच आदतें यहां दी जा रही हैं, जिन्हें काम के बीच में भी आजमाया जा सकता है।
हंसी का अभ्यास, तीस सेकंड
इसमें पहले तीन गहरी सांसें लें, फिर पेट पर हाथ रखकर ही-ही-ही, हा-हा-हा की आवाज निकालें और धीरे-धीरे आवाज बढ़ाएं। बीस से तीस सेकंड बाद एक गहरी सांस लें और किसी बात के लिए आभार महसूस करें। डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता नेटली वान डेर वाल के एक विश्लेषण में पाया गया कि बिना किसी चुटकुले के की गई हंसी का संबंध भी चिंता और अवसाद के लक्षणों में कमी से रहा। हालांकि इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना गया है।
सूक्ष्म योग, पंद्रह से तीस सेकंड
हर पंद्रह मिनट में पंद्रह से तीस सेकंड का खिंचाव करने को कामकाजी क्षमता में करीब पंद्रह प्रतिशत सुधार से जोड़ा गया है। एक आसान तरीका यह है कि पीठ के पीछे उंगलियां आपस में फंसाएं, सांस भरते हुए हाथों को नीचे की ओर खींचें और छाती ऊपर उठाएं, फिर सांस छोड़ें और दो से तीन सांसों तक इसी स्थिति में रहें। अगर कोई चोट हो तो पहले चिकित्सक से सलाह ले लेनी चाहिए।
तीन धीमी गहरी सांसें
धीमी और गहरी सांस लेने से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जो शरीर को शांत करने का काम करता है। यूनिवर्सिटी ऑफ नेपल्स फेडरिको द्वितीय के शोधकर्ता अमित कुमार से जुड़े एक अध्ययन में मस्तिष्क की अल्फा और थीटा तरंगों में बदलाव देखा गया। हर सांस में करीब दस सेकंड लगाएं और सांस छोड़ने में थोड़ा अधिक समय लें।
आत्म-करुणा का स्पर्श, बीस सेकंड
इसमें दोनों हाथ हृदय या पेट पर रखकर खुद के लिए कुछ अच्छा सोचा जाता है। एक अध्ययन में बीस सेकंड के इस अभ्यास के बाद तुलनात्मक समूह की तुलना में कोर्टिसोल का स्तर कम पाया गया। बाद के एक अध्ययन में नियमित अभ्यास को छह महीने में आत्म-करुणा में अधिक सुधार से जोड़ा गया।
रोजमर्रा के कामों को विराम बनाएं
पांचवां तरीका यह है कि रोजमर्रा के सामान्य कामों को ही सचेत विराम में बदल दिया जाए, जैसे चाय बनाते या हाथ धोते समय पूरा ध्यान उसी क्रिया पर रखना।
ध्यान रखने की बात यह है कि कोई एक तरीका हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। गंभीर या लगातार बनी रहने वाली स्थिति में पेशेवर मदद लेना जरूरी है।
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