'नाराज फूफा' से 'राहुल मियां' तक: BJP-कांग्रेस में तीखी जुबानी जंग

नई दिल्ली | आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तीखे व्यक्तिगत हमलों और नए उपनामों (विशेषणों) के दौर में पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को 'नाराज फूफा' कहे जाने और भाजपा नेता नितिन नबीन द्वारा राहुल गांधी को 'राहुल मियां' संबोधित किए जाने के बाद दोनों दलों के बीच सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां पलटवार करते हुए इसे विफलताओं से ध्यान भटकाने की राजनीति बताया, वहीं युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई शहरों में पुतले फूंककर विरोध जताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया भाषणों में विपक्ष के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि देश के विकास कार्यों पर कुछ लोग लगातार असंतुष्ट रहते हैं। पीएम ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, वंदे भारत, फ्रेट कॉरिडोर या बुलेट ट्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर विपक्ष केवल कमियां ढूंढता है।
पीएम ने तंज कसते हुए कहा था कि अब फ्रेट कॉरिडोर बनने पर 'नाराज फूफाजी' पूछेंगे कि ट्रक ड्राइवरों का क्या होगा। भाजपा ने इस बयान को आगे बढ़ाते हुए एक व्यंग्यात्मक वीडियो जारी किया, जिसमें विपक्ष की तुलना हर बात पर रूठने वाले पारिवारिक सदस्य से की गई।
प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीधा हमला बोला। खड़गे ने कहा:
"मोदी जी के पास हर साल विपक्ष के लिए एक नया विशेषण होता है। कभी 'दिमागी नक्सल', कभी 'अर्बन नक्सल', कभी 'खान मार्केट गैंग' और अब 'नाराज फूफा'। विशेषण भले ही बदलते रहें, लेकिन इस सरकार की जनविरोधी नीतियां नहीं बदलतीं। महंगाई, बेरोजगारी और अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए प्रधानमंत्री ऐसे नाम गढ़ते हैं।"
विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब भाजपा नेता नितिन नबीन ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में वंदे मातरम से जुड़े एक विवाद का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी को 'राहुल मियां' कहते हुए आरोप लगाया कि वे विदेशी संस्कृति में पले-बढ़े हैं, इसलिए उस 'वंदे मातरम' का महत्व नहीं समझ सकते जिसके लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया।
इस बयान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताते हुए कई स्थानों पर नितिन नबीन के पुतले फूंके। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर ही वंदे मातरम के पहले दो पदों को राष्ट्रगीत के रूप में गाने का सर्वसम्मत फैसला लिया था, लेकिन भाजपा हर ऐतिहासिक संदर्भ को चुनावी हथियार बना रही है।
भाजपा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों की आलोचना को लेकर भी कांग्रेस को 'नाराज फूफा' का तमगा दिया। भाजपा का कहना है कि जी-20, एआई समिट और अब नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन— देश की हर अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर विपक्ष को केवल विरोध करना होता है। वहीं, प्रधानमंत्री ने हाल ही में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 'झूठ की गूंज' करार दिया था।
सियासी जानकारों का मानना है कि राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों दल आक्रामक चुनावी नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं। भाजपा इसे विकास बनाम नकारात्मकता के खांचे में फिट कर रही है, जबकि विपक्ष बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है। आने वाले दिनों में यह बयानबाजी सोशल मीडिया और चुनावी सभाओं में और तेज होने के आसार हैं।
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