12 साल बाद मां नंदा देवी की बड़ी जात: दुर्गम रास्तों पर तैनात हुए SDRF व पर्वतारोही जवान; SP बोले- 'आस्था की डगर पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता'

चमोली | देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले में 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही मां नंदा देवी की पावन 'लोकजात' और 'बड़ी जात' को लेकर श्रद्धालुओं में जबर्दस्त उत्साह है। वहीं, विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मानसूनी बारिश के बीच यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार ने चेपडो मैदान में पुलिस बल को ब्रीफ करते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और जवानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
खबर की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):
- 12 साल बाद महाआयोजन: मां नंदा देवी की ऐतिहासिक 'बड़ी जात' और 'लोकजात' में उमड़ रहा आस्था का सैलाब।
- सुरक्षा का कड़ा पहरा: थराली यात्रा मार्ग को 1 जोन और 4 सेक्टरों में बांटा गया; SDRF के साथ पर्वतारोही पुलिस टीम तैनात।
- चुनौतीपूर्ण भूगोल: बारिश, फिसलन और बेहद कठिन पैदल ट्रैक्स के मद्देनजर अनुभवी पुलिसकर्मियों को सौंपी गई कमान।
- डोलियों का पड़ाव: किरूली, पगना और सूना गांव होते हुए शुक्रवार को चेपड़ो गांव पहुंची मां नंदा की उत्सव डोली।
- 20 सितंबर को महाविधान: होमकुंड में विशेष पूजा और तर्पण के बाद चौसिंग्या खाडू (चार सींगों वाला मेढ़ा) कैलाश के लिए विदा होगा; 30 सितंबर को कुरुड़ में समापन।
1 जोन, 4 सेक्टर और पर्वतारोही पुलिस दल की तैनाती
एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि थराली क्षेत्र के पूरे यात्रा मार्ग को सुरक्षा की दृष्टि से 1 जोन और 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर में प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
हिमालय की कठिन चढ़ाई, संकरे रास्ते और बारिश की वजह से होने वाली फिसलन को देखते हुए मार्ग पर राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के साथ ऐसे पुलिस जवानों को तैनात किया गया है जो पहले भी इस यात्रा का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित पर्वतारोही पुलिस दल को भी संवेदनशील पॉइंट्स पर मुस्तैद किया गया है।
'श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता': SP चमोली
चेपडो मैदान में जवानों को ब्रीफ करते हुए पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा:
"मां नंदा जात यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अगाध आस्था और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय है। वर्तमान में बारिश का मौसम है और पैदल मार्ग बेहद दुर्गम हैं। खड़ी चढ़ाई-उतराई और फिसलन जैसी कठिन परिस्थितियों में श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। पुलिस बल यह सुनिश्चित करेगा कि आस्था की इस कठिन डगर पर चलने वाला हर भक्त सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे।"
गांव-गांव में डोलियों का भव्य स्वागत, चेपड़ो में रात्रि प्रवास
बड़ी जात यात्रा में मां नंदा की डोली के साथ चल रहे श्रद्धालुओं का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों (ढोल-दमाऊं) और जयकारों के बीच यात्रा आगे बढ़ रही है:
- गुरुवार को बड़ी जात बंड क्षेत्र की डोली ने किरूली गांव में और मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली ने पगना गांव में रात्रि प्रवास किया था।
- मां राजराजेश्वरी की उत्सव डोली डूंगरी गांव होते हुए सूना गांव पहुंची।
- शुक्रवार को यात्रा अपने अगले पड़ाव के तहत थराली गांव होते हुए चेपड़ो गांव पहुंची, जहां रात्रि प्रवास का आयोजन हुआ। मां के स्वागत के लिए पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है।
20 सितंबर को होमकुंड में होगी कैलाश विदाई, 30 को समापन
मां नंदा देवी की इस बड़ी जात का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक धार्मिक पड़ाव 20 सितंबर को होमकुंड में होगा।
- होमकुंड में विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक तर्पण के बाद सनातन परंपरा के तहत 'चौसिंग्या खाडू' (चार सींगों वाले मेढ़े) की पीठ पर रिंगाल की छंतोली व प्रसाद बांधकर उसे अकेले हिमालयी चोटियों (कैलाश) की ओर विदा किया जाएगा।
- इस मुख्य धार्मिक अनुष्ठान के बाद मां नंदा की डोली वापसी की यात्रा पर निकलेगी।
- अंत में मां की डोली अपने मूल सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचेगी, जहां 30 सितंबर को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ इस 12 वर्षीय बड़ी जात यात्रा का औपचारिक समापन होगा।
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