भारतीय रेलवे को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा: ₹20,804 करोड़ की 8 रेल परियोजनाओं को मंजूरी, 9 राज्यों में दौड़ेगी विकास की रफ्तार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) की बैठक में भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दो बड़े फैसलों के तहत कुल 8 महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 20,804 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी, जिससे देश के 9 राज्यों में रेलवे नेटवर्क 1,196 किलोमीटर तक विस्तारित होगा।
कैबिनेट बैठक के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पीएम-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई इन परियोजनाओं से रेल लाइनों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और रूटों पर भीड़भाड़ (कंजेशन) कम होगी।
1. ₹10,783 करोड़ की लागत से 3 बड़ी परियोजनाएं (मध्य व पूर्वी भारत)
कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किमी लंबे रेल नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दी है। इससे लगभग 56 लाख आबादी वाले 4,790 गांवों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
मंजूर की गईं 3 मुख्य परियोजनाएं:
- खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बगदेही) चौथी रेल लाइन
- कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन
- बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ:
- यह पूरा रूट कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे आवश्यक कच्चे माल की ढुलाई का मुख्य मार्ग है।
- क्षमता विस्तार से सालाना 27 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी।
- इससे देश का तेल आयात करीब 12 करोड़ लीटर कम होगा और कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में 62 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी, जो कि लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
2. दक्षिण भारत के लिए ₹10,021 करोड़ के 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स
कैबिनेट ने दक्षिण भारत के चार प्रमुख राज्यों—तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों के लिए पांच बड़े मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को साल 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रेलवे नेटवर्क में लगभग 540 किमी की वृद्धि होगी और 52 लाख आबादी वाले 2,121 गांवों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
मंजूर किए गए 5 प्रोजेक्ट्स:
- अराक्कोणम - रेनिगुंटा: तीसरी और चौथी लाइन (77 किमी)
- व्हाइटफील्ड - बंगारपेट: तीसरी और चौथी लाइन (47 किमी)
- होसुर - ओमालूर: दोहरीकरण (147 किमी)
- सेलम - करूर - डिंडीगुल: दोहरीकरण (159 किमी)
- सिकंदराबाद (घटकेसर) - काजीपेट: मल्टी-ट्रैकिंग (110 किमी)
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान
इन सभी परियोजनाओं से देश के दर्जनों प्रमुख तीर्थस्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन केंद्रों तक रेल कनेक्टिविटी बेहद सुगम हो जाएगी:
- मध्य व पूर्वी भारत: तारातारिणी मंदिर, झारसुगुड़ा जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर।
- दक्षिण भारत: विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर, तिरुत्तनी सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, पद्मावती अम्मावरी मंदिर, कोटिलिंगेश्वर देवालय, कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF), होगेनक्कल फॉल्स, कोडाईकनाल हिल्स, सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व, यादगिरिगुट्टा मंदिर और भोंगीर किला।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से न केवल यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा, बल्कि औद्योगिक माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ने से देश की लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह कदम भारत के 'नेट जीरो कार्बन एमिशन' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
