
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों (Packaged Foods) में अत्यधिक नमक, चीनी और वसा (फैट) के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी पक्षों और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को निर्देश दिया कि वे पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी लेबल (FOPL - Front-of-Pack Warning Label) लगाने के मुद्दे पर 'राष्ट्रीय हित' में फैसला लें।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को '3S और आवर हेल्थ सोसाइटी' नामक चैरिटेबल ट्रस्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने साफ कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर सभी पक्षों से जानकारी मांगते हुए जल्द ही एक विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा, जिसे एक-दो दिन में वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है।
सुनवाई की 4 बड़ी बातें:
- 'राष्ट्रीय हित' का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "हमें केवल लोगों, विशेषकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता है। सभी पक्ष इसे देशहित में देखें।"
- पैकेट के पीछे की जानकारी नाकाफी: कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि क्या ऐसी कोई गाइडलाइन है जो तय करे कि किस सीमा के बाद किसी उत्पाद को 'हाई शुगर', 'हाई साल्ट' या 'हाई फैट' माना जाएगा?
- काजू और कुरकुरे एक समान नहीं: याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सरकार पौष्टिक चीजों (काजू, अंडे) और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स को एक ही तराजू में नहीं तौल सकती।
- चेतावनी के रंग पर बहस: नॉन-वेज के लिए लाल और वेज के लिए हरा निशान होता है, ऐसे में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की चेतावनी के लिए अलग रंग का सुझाव दिया गया।
'सामने दिखनी चाहिए चेतावनी, पीछे पढ़ने कौन जाता है'
सुनवाई के दौरान पीठ ने FSSAI से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि पोषण से जुड़ी जानकारी हमेशा पैकेट के पीछे बारीक अक्षरों में लिखी होती है, जिसे आम खरीदार या बच्चे समझ नहीं पाते। कोर्ट ने पूछा कि क्या प्राधिकरण के पास कोई स्पष्ट वैज्ञानिक पैमाना है, जिससे यह तय हो सके कि कोई उत्पाद तय सीमा से अधिक अस्वास्थ्यकर (अनहेल्दी) है?
इस पर FSSAI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत पैकेट के पीछे प्रति 100 ग्राम और प्रति सर्विंग (प्रति खुराक) के आधार पर पोषक तत्वों का विवरण देना अनिवार्य होता है।
'अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर लाल रंग की जगह दूसरा रंग इस्तेमाल हो'
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने जोरदार पैरवी करते हुए कहा कि बाजार में बिकने वाले कुरकुरे जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स को पौष्टिक भोजन जैसे अंडे या नमकीन काजू की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर बेहद स्पष्ट और सख्त चेतावनी होनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में शाकाहारी के लिए 'हरा' और मांसाहारी के लिए 'लाल' रंग का निशान पहले से तय है। ऐसे में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने से उपभोक्ताओं में भ्रम हो सकता है, इसलिए इसके लिए किसी अन्य रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए।
FSSAI का प्रस्तावित प्लान
इससे पहले FSSAI ने शीर्ष अदालत में हलफनामा देकर बताया था कि उसने अधिक संतृप्त वसा (Saturated Fat), चीनी और नमक वाले उत्पादों पर लाल रंग का हेक्सागोनल (छह कोनों वाला) FOPL चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। नियामक का कहना है कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय ही अस्वास्थ्यकर तत्वों के प्रति तुरंत और सीधे तौर पर सतर्क करना है।
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