🔴 Latest
🔴 सीएम धामी ने खास अंदाज में दी पीएम को बधाई: बोले- 'आप आधुनिक भारत के राष्ट्र-शिल्पी'; पहली मुलाकात का डर और संबल भी पत्र में किया साझा🔴 तकलामकान की रेत के नीचे खुला रहस्य, रेगिस्तान में मिले पानी के दो बड़े भंडार🔴 उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल की बदल रही आवाज, गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट में खुलासा🔴 उत्तराखंड के होमस्टे को मिलेगी हरी पहचान, दस मानकों पर परखकर दिया जाएगा इको फ्लावर बैज🔴 कानपुर के पनकी में श्रमिकों के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, तीन दिन में दस हजार मजदूरों की होगी जांच🔴 सीएम धामी ने खास अंदाज में दी पीएम को बधाई: बोले- 'आप आधुनिक भारत के राष्ट्र-शिल्पी'; पहली मुलाकात का डर और संबल भी पत्र में किया साझा🔴 तकलामकान की रेत के नीचे खुला रहस्य, रेगिस्तान में मिले पानी के दो बड़े भंडार🔴 उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल की बदल रही आवाज, गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट में खुलासा🔴 उत्तराखंड के होमस्टे को मिलेगी हरी पहचान, दस मानकों पर परखकर दिया जाएगा इको फ्लावर बैज🔴 कानपुर के पनकी में श्रमिकों के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, तीन दिन में दस हजार मजदूरों की होगी जांच

गणेशोत्सव की धूम: भव्य पंडालों में विराजे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर होगा विसर्जन, कृत्रिम तालाबों पर जोर

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom17 September 2026

AI News Reader

खबर सुनें (Listen Now)

गणेशोत्सव की धूम: भव्य पंडालों में विराजे बप्पा, अनंत चतुर्दशी पर होगा विसर्जन, कृत्रिम तालाबों पर जोर

नई दिल्ली: देश भर में गणेशोत्सव की धूम है। मुंबई और पुणे से लेकर दिल्ली और अन्य शहरों तक भव्य पंडाल सजे हैं, जहां श्रद्धालुओं की कतारें सुबह से देर रात तक लगी रहती हैं। दस दिन चलने वाले इस उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर होगा, जब गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी।

पंडालों की सजावट हर साल की तरह इस बार भी चर्चा में है। कहीं मंदिरों की प्रतिकृति तैयार की गई है, तो कहीं ऐतिहासिक इमारतों का स्वरूप उकेरा गया है। कुछ जगह विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिन्हें देखने दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। पंडालों में भजन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार चल रहा है।

पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन पर जोर

इस बार विसर्जन को लेकर तैयारियों में पर्यावरण का ध्यान खास तौर पर रखा गया है। दिल्ली में करीब 90 कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं, ताकि प्रतिमाओं का विसर्जन नदी में करने के बजाय इन्हीं में किया जा सके। विसर्जन से पहले और बाद में यमुना के पानी की जांच कराने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे गुणवत्ता पर पड़ने वाले असर का आकलन हो सके।

बीते कुछ वर्षों में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं और प्राकृतिक रंगों का चलन तेजी से बढ़ा है। कई परिवार अब घर पर ही बाल्टी या टब में विसर्जन कर लेते हैं और बाद में उस मिट्टी को गमले में डाल देते हैं। स्कूलों और संस्थाओं ने भी बच्चों को मिट्टी की प्रतिमा बनाना सिखाकर इस बदलाव में भूमिका निभाई है।

उत्सव की झलक

  • अनंत चतुर्दशी पर होगा गणपति बप्पा का विसर्जन
  • मुंबई और पुणे के पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
  • दिल्ली में विसर्जन के लिए बनाए गए करीब 90 कृत्रिम तालाब
  • मिट्टी की प्रतिमा और प्राकृतिक रंगों का बढ़ता चलन

गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप देने की परंपरा एक सदी से भी अधिक पुरानी है। घर की चारदीवारी से निकालकर इसे मोहल्ले के चौक तक लाने के पीछे सोच यही थी कि उत्सव लोगों को जोड़ने का जरिया बने। आज भी पंडालों के आयोजन में मोहल्ले के लोग मिलकर चंदा जुटाते हैं और व्यवस्था संभालते हैं।

उत्सव का आर्थिक पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। मूर्तिकारों, ढोल-ताशा दलों, फूल और मिठाई विक्रेताओं, सजावट और रोशनी का काम करने वालों के लिए यह पूरा महीना साल की सबसे बड़ी कमाई का समय होता है। प्रतिमा बनाने का काम तो महीनों पहले शुरू हो जाता है।