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उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल की बदल रही आवाज, गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट में खुलासा

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom17 September 2026

AI News Reader

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उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल की बदल रही आवाज, गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट में खुलासा

श्रीनगर गढ़वाल: हिमालय की ऊंचाइयों पर रहने वाले उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल को लेकर एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट में पाया गया है कि मोनाल की आवाज में बदलाव दर्ज हो रहा है। यह निष्कर्ष पक्षी विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

मोनाल हिमालयी क्षेत्र का सबसे रंगीन पक्षियों में गिना जाता है। नर मोनाल के पंख धूप पड़ने पर नीले, हरे, बैंगनी और तांबे जैसे रंगों में चमकते हैं, जिसकी वजह से इसे प्रकृति का जीवंत इंद्रधनुष कहा जाता है। यह आमतौर पर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बुग्यालों और घने जंगलों की सीमा के आसपास पाया जाता है।

आवाज क्यों मायने रखती है

पक्षी विज्ञान में किसी प्रजाति की आवाज को उसकी पहचान का सबसे भरोसेमंद सूत्र माना जाता है। पक्षी आवाज के जरिए ही साथी को बुलाते हैं, अपने इलाके की सीमा तय करते हैं और खतरे की चेतावनी देते हैं। यही वजह है कि आवाज में दर्ज होने वाला कोई भी बदलाव शोधकर्ताओं के लिए अहम संकेत होता है और उसे बारीकी से दर्ज किया जाता है।

वैज्ञानिक आमतौर पर लंबे समय तक ध्वनि रिकॉर्डिंग जुटाकर उनका विश्लेषण करते हैं। आवाज की आवृत्ति, उसकी अवधि और दोहराव के पैटर्न की तुलना पुराने आंकड़ों से की जाती है। यह काम धैर्य मांगता है, क्योंकि ऊंचे और दुर्गम इलाकों में पहुंचकर रिकॉर्डिंग जुटाना अपने आप में चुनौती भरा होता है।

मोनाल के बारे में

  • उत्तराखंड का राज्य पक्षी है मोनाल
  • ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बुग्यालों के आसपास मिलता है
  • नर पक्षी के पंखों की चमक इसे सबसे अलग पहचान देती है
  • भारत में यह संरक्षित प्रजातियों की सूची में शामिल है

हिमालयी पारिस्थितिकी पर लंबे समय से शोध हो रहा है और वैज्ञानिक लगातार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऊंचाई वाले इलाकों के जीव-जंतु बदलते हालात के साथ किस तरह ढल रहे हैं। इस लिहाज से मोनाल जैसी प्रजाति पर होने वाला अध्ययन पूरे पर्वतीय तंत्र की सेहत का संकेतक बन सकता है।

उत्तराखंड के लिए मोनाल केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी है। लोकगीतों और पहाड़ी परंपराओं में इसका जिक्र मिलता है। यही वजह है कि इससे जुड़े हर नए अध्ययन पर स्थानीय लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।