उत्तराखंड के होमस्टे को मिलेगी हरी पहचान, दस मानकों पर परखकर दिया जाएगा इको फ्लावर बैज

देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन विभाग होमस्टे संचालकों को हरी पहचान देने जा रहा है। दस मानकों पर परखने के बाद चुने गए होमस्टे को इको फ्लावर बैज दिया जाएगा। देहरादून से शुरू हो रही इस पहल का मकसद पर्यटन को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और मेहमानों को यह भरोसा देना है कि जिस घर में वे ठहर रहे हैं, वह प्रकृति का ध्यान रखता है।
बीते कुछ वर्षों में उत्तराखंड में होमस्टे का चलन तेजी से बढ़ा है। होटल के मुकाबले यहां यात्री को स्थानीय परिवार के साथ रहने, पहाड़ी खानपान चखने और गांव की दिनचर्या को करीब से देखने का अवसर मिलता है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह आजीविका का भरोसेमंद जरिया बनकर उभरा है और कई परिवारों को गांव में ही रोजगार मिला है।
हरी पहचान क्यों जरूरी
पर्यटकों की बढ़ती संख्या पहाड़ों पर दबाव भी बढ़ाती है। कूड़े का निपटान, पानी की खपत और बिजली का इस्तेमाल, ये सब संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में सीधे असर डालते हैं। ऐसे में यदि ठहरने की जगह ही पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीके अपनाए, तो नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही सोच इस बैज के पीछे है।
आज का यात्री भी पहले से अधिक जागरूक है। कई पर्यटक ठहरने की जगह चुनते समय यह देखते हैं कि वहां प्लास्टिक का इस्तेमाल कम है या नहीं, पानी बचाने के इंतजाम हैं या नहीं और स्थानीय समुदाय को उसका लाभ मिल रहा है या नहीं। ऐसे में एक स्पष्ट पहचान चिह्न संचालक और मेहमान, दोनों के लिए उपयोगी साबित होता है।
पहल की मुख्य बातें
- दस मानकों पर परखने के बाद मिलेगा इको फ्लावर बैज
- देहरादून के होमस्टे संचालकों से हो रही शुरुआत
- पंजीकरण और हरी पहचान पर पर्यटन विभाग का जोर
- पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य
होमस्टे संचालकों के लिए यह बैज व्यावसायिक रूप से भी फायदेमंद हो सकता है। ऑनलाइन बुकिंग के दौर में कोई भी आधिकारिक मान्यता यात्री के भरोसे को बढ़ाती है और प्रतिस्पर्धा में अलग पहचान देती है। छोटे संचालकों के लिए, जिनके पास बड़े प्रचार का साधन नहीं होता, यह अलग से मददगार साबित होगा।
उत्तराखंड में पर्यटन सीधे तौर पर लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में पर्यावरण और रोजगार, दोनों का संतुलन बनाए रखना राज्य के लिए जरूरी है। जानकार मानते हैं कि इस तरह की पहल तभी सार्थक होगी जब मानकों की नियमित जांच होती रहे और बैज केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए।
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