तकलामकान की रेत के नीचे खुला रहस्य, रेगिस्तान में मिले पानी के दो बड़े भंडार

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे शुष्क इलाकों में गिने जाने वाले तकलामकान रेगिस्तान की रेत के नीचे पानी के दो बड़े भंडार मिलने की जानकारी सामने आई है। जिस इलाके को पानी के नाम पर लगभग खाली माना जाता रहा, वहां जमीन के नीचे मीठा और खारा, दोनों तरह का भूजल मौजूद होने की बात ने शोधकर्ताओं को चौंका दिया है।
तकलामकान चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान है और दुनिया के उन गिने-चुने इलाकों में शामिल है जहां रेत के टीले लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। यही वजह है कि इसे रेत का समुद्र भी कहा जाता है। चारों ओर ऊंचे पर्वतों से घिरे होने के कारण यहां नमी वाली हवाएं पहुंच ही नहीं पातीं और बारिश न के बराबर होती है।
रेगिस्तान के नीचे पानी कैसे
भूविज्ञान में यह असामान्य बात नहीं मानी जाती कि सूखे इलाकों के नीचे पानी की परतें मौजूद हों। आसपास के पर्वतों से आने वाला बर्फ का पिघला पानी सदियों तक रिसकर जमीन के भीतर जमा होता रहता है और रेत तथा चट्टानों की परतों के बीच कैद हो जाता है। ऐसे भंडार कई बार हजारों साल पुराने होते हैं।
मीठे और खारे, दोनों तरह के पानी का एक ही क्षेत्र में मिलना बताता है कि यहां की भूगर्भीय संरचना जटिल है। आमतौर पर ऊपरी परतों में वाष्पीकरण और खनिज घुलने की वजह से पानी खारा हो जाता है, जबकि गहरी परतों में अपेक्षाकृत शुद्ध पानी बचा रह सकता है।
एक नजर तथ्यों पर
- तकलामकान की रेत के नीचे मिले पानी के दो बड़े भंडार
- भंडार में मीठा और खारा, दोनों तरह का भूजल
- चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान है तकलामकान
- लगातार खिसकते रेत के टीलों के लिए जाना जाता है यह इलाका
ऐसी खोजें केवल भूगोल की जानकारी नहीं बढ़ातीं। वे यह समझने में भी मदद करती हैं कि किसी इलाके की जलवायु सदियों में कैसे बदली। जमीन के नीचे कैद पानी में घुले तत्वों की जांच से पता चलता है कि वह पानी कब और किन परिस्थितियों में वहां पहुंचा था।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि भूजल के ऐसे भंडार सीमित होते हैं और उनका दोबारा भरना बेहद धीमी प्रक्रिया है। रेगिस्तानी इलाकों में इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी माना जाता है, वरना कुछ ही दशकों में सदियों की जमा पूंजी खत्म हो सकती है।


