उत्तराखंड को लघु जलविद्युत का बड़ा पैकेज: 62 मेगावाट की चार नई परियोजनाएं, पहाड़ों में खुलेंगे रोजगार के रास्ते

देहरादून: ऊर्जा प्रदेश बनने की दिशा में बढ़ रहे उत्तराखंड को लघु जलविद्युत के मोर्चे पर बड़ी सौगात मिली है। राज्य को कुल 62 मेगावाट क्षमता की चार नई परियोजनाओं का पैकेज मिला है, जिनसे न सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
लघु जलविद्युत परियोजनाएं उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए इसलिए उपयुक्त मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें बड़े बांध और विशाल जलाशय की जरूरत नहीं पड़ती। नदी या गाड़-गदेरे के प्रवाह से ही बिजली तैयार होती है, जिससे विस्थापन और पर्यावरणीय दबाव दोनों अपेक्षाकृत कम रहते हैं। निर्माण और संचालन दोनों चरणों में स्थानीय स्तर पर काम मिलता है।
बड़ी योजना का हिस्सा हैं ये परियोजनाएं
राज्य के जल विद्युत निगम ने लघु जलविद्युत के क्षेत्र में विस्तार की व्यापक तैयारी की है। निगम की योजना के तहत 14 नई लघु परियोजनाओं से करीब 165 मेगावाट बिजली जुटाने और हजारों लोगों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। 62 मेगावाट का यह ताजा पैकेज उसी बड़ी योजना की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में प्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा के मोर्चे पर लगातार बढ़त बनाई है। सौर ऊर्जा में राज्य की उत्पादन क्षमता एक गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि जलविद्युत की नई परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलती रही है। बिजली भंडारण के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
एक नजर में
- 62 मेगावाट क्षमता की चार नई लघु जलविद्युत परियोजनाएं
- निगम की बड़ी योजना में 14 परियोजनाओं से 165 मेगावाट का लक्ष्य
- सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता एक गीगावाट के आंकड़े तक
- निर्माण और संचालन, दोनों चरणों में स्थानीय रोजगार की संभावना
सर्दियों में प्रदेश की बिजली मांग बढ़ जाती है और उस दौर में राज्य को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिहाज से अहम है। लघु परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्ध कराकर पारेषण में होने वाले नुकसान को भी घटाती हैं।
पर्वतीय जिलों में पलायन एक बड़ी चुनौती रही है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं यदि तय समय पर पूरी हों, तो वे स्थानीय युवाओं को गांव के पास ही तकनीकी काम से जोड़ सकती हैं और पलायन की रफ्तार धीमी करने में मदद कर सकती हैं।
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