उत्तराखंड में पॉलीहाउस योजना पर कड़ा फैसला: सुस्त रफ्तार पड़ी भारी, कंपनी से छीना काम; पाई-पाई वसूलेगी सरकार

देहरादून:उत्तराखंड के बागवानी (उद्यान) क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के दावे के साथ शुरू हुई 551.05 करोड़ रुपए की महात्वाकांक्षी पॉलीहाउस योजना पर धामी सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। नाबार्ड की आरआईडीएफ (RIDF) योजना के तहत 22 हजार पॉलीहाउस बनाने का जिम्मा संभालने वाली कार्यदायी संस्था 'ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड' को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
तय समय के करीब 2 साल बीत जाने के बाद भी योजना लक्ष्य से काफी पीछे चल रही थी। सरकार ने न सिर्फ कंपनी से काम वापस ले लिया है, बल्कि पहले चरण में किए गए सरकारी भुगतान की वसूली (रिकवरी) करने का भी फैसला किया है। अब यह काम विभाग के इम्पैनल्ड वेंडर्स के जरिए कराया जाएगा और डिजिटल करेंसी से पेमेंट होगा।
खबर की 3 बड़ी बातें:
- कंपनी पर एक्शन: 22 हजार पॉलीहाउस निर्माण में लापरवाही बरतने पर सरकारी कंपनी 'ब्रेथवेट' को हटाया गया।
- पैसे की वसूली: संस्था को पहले दिए गए सरकारी बजट की पाई-पाई की रिकवरी की जाएगी।
- नई व्यवस्था: अब उद्यान विभाग के इम्पैनल्ड वेंडर पॉलीहाउस बनाएंगे; भुगतान सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) से किया जाएगा।
लापरवाही पर एक्शन: 22 हजार का था लक्ष्य, धरातल पर सुस्त रही रफ्तार
राज्य के किसानों को क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती से जोड़ने के लिए 551.05 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट मंजूर किया गया था। लक्ष्य था कि पूरे राज्य में करीब 22 हजार छोटे पॉलीहाउस तेजी से खड़े किए जाएं, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो सके। करीब दो साल पहले यह काम ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड को सौंपा गया था। लेकिन तय समय में कंपनी की सुस्त चाल के चलते योजना रफ्तार नहीं पकड़ सकी। समीक्षा के बाद सरकार ने कंपनी पर सख्त कार्रवाई करते हुए एग्रीमेंट खत्म करने और सरकारी धन वापस वसूलने का आदेश जारी कर दिया।
नई व्यवस्था: CBDC से होगा पेमेंट, बिचौलियों पर लगेगी लगाम
कार्यदायी संस्था को हटाने के बाद अब विभाग ने सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है:
- इम्पैनल्ड वेंडर्स को जिम्मा: अब विभाग में पहले से रजिस्टर्ड और अधिकृत वेंडर्स के जरिए किसानों के खेतों में पॉलीहाउस लगाए जाएंगे।
- डिजिटल करेंसी (CBDC) से भुगतान: निर्माण कार्य के भुगतान में पारदर्शिता लाने और देरी रोकने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के जरिए सीधी वित्तीय व्यवस्था लागू की जा रही है।
मंत्री बोले- 'लापरवाह कंपनी बाहर, रिकवरी की तैयारी'
"राज्य में पॉलीहाउस योजना तय रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पा रही थी, इसलिए संबंधित कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। अब कंपनी से सरकारी धन की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। किसानों के साथ मिलकर काम शुरू किया गया है और अब धरातल पर पहले से बेहतर प्रगति दिख रही है।"
— गणेश जोशी, कृषि एवं उद्यान मंत्री, उत्तराखंड
TV10 INDIA इनसाइट: कंपनी तो बदल दी, पर 2 साल की देरी की भरपाई कैसे होगी?
सरकार ने कंपनी को हटाकर सख्त संदेश जरूर दिया है, लेकिन उद्यान विभाग के सामने चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं:
- समय की भरपाई: 22 हजार पॉलीहाउस के विशाल लक्ष्य को हासिल करने में पहले ही दो साल का कीमती वक्त बर्बाद हो चुका है।
- जटिल प्रक्रियाएं: योजना की धीमी गति के लिए केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि जमीन चयन, किसानों के अंशदान और विभाग के पेचीदा नियम भी जिम्मेदार रहे हैं।
- सख्त मॉनिटरिंग जरूरी: नई वेंडर व्यवस्था और सीबीडीसी भुगतान प्रणाली कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होती है, इसी पर उत्तराखंड के हजारों किसानों का भविष्य निर्भर करेगा।
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