उत्तराखंड: मान्यता न लेने वाले 200 से ज्यादा मदरसे होंगे बंद, प्रशासन का सख्त आदेश

देहरादून
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग हुए दो महीने बीत जाने के बाद भी प्रदेश के 452 मदरसों में से अधिकांश बिना मान्यता के ही संचालित हो रहे हैं। हद तो यह है कि 200 से अधिक मदरसों ने अब तक मान्यता लेने के लिए आवेदन तक नहीं किया है।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अब ऐसे मदरसों के खिलाफ आर-पार की कार्रवाई का मन बना लिया है। शासन ने दो टूक निर्देश दिए हैं कि नियमों की अनदेखी कर बिना मान्यता संचालित हो रहे सभी मदरसों को जिला प्रशासन की मदद से बंद (सील) करवाया जाएगा।
3 बड़ी बातें:
200+ मदरसों पर बंदी की तलवार: मान्यता के लिए आवेदन न करने वाले 200 से अधिक मदरसों को जिला प्रशासन बंद कराएगा।
कार्रवाई शुरू: हरिद्वार के मंगलौर में बिना मान्यता चल रहे 2 मदरसों को सील किया गया; पूरे प्रदेश में जल्द चलेगा अभियान।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: मान्यता न होने से बच्चों को न मिड-डे मील मिल रहा, न किताबें व ड्रेस; प्रमाण पत्र भी अमान्य।
'बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाना था मकसद, पर मदरसे नहीं ले रहे मान्यता'
मदरसा छात्रों को आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए धामी सरकार ने 1 जुलाई को मदरसा बोर्ड भंग कर 'उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' का गठन किया था। सरकार का विजन था कि मदरसों के बच्चे सिर्फ धार्मिक तालीम तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर सीखकर डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट और आईएएस-आईपीएस बनें। लेकिन सैकड़ों मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता न लेकर बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं।
बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। हाल ही में हरिद्वार जिले के मंगलौर में दो अवैध मदरसों को सील किया गया। शासन के अनुसार, बिना मान्यता चल रहे अन्य मदरसों को भी चिह्नित कर जल्द सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
मान्यता की क्या है स्थिति?
पहले सत्र में मान्यता: प्राधिकरण ने पहले सत्र में 7 मदरसों सहित 9 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी।
2 सितंबर को फैसला: 26 अन्य मदरसों को 2 सितंबर को मान्यता देने की तैयारी है।
200 आवेदन पेंडिंग: करीब 200 मदरसों ने इन्वेस्टमेंट पोर्टल के जरिए मान्यता के लिए आवेदन किया है, जिनकी जांच चल रही है।
200+ ने आवेदन ही नहीं किया: 200 से ज्यादा मदरसे ऐसे हैं जिन्होंने अब तक पोर्टल पर कोई आवेदन ही नहीं किया है, जिन्हें बंद किया जाएगा।
ऐसे हो रहा है बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि बिना मान्यता चल रहे मदरसों के कारण बच्चों का भारी नुकसान हो रहा है:
मान्यता न होने के कारण इन बच्चों को सरकारी मिड-डे मील नहीं मिल पा रहा है।
सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त स्कूल ड्रेस और किताबें बच्चों तक नहीं पहुंच रहीं।
शिक्षा विभाग से मान्यता न होने की वजह से इन मदरसों द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी अमान्य (Invalid) हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक रहा है।
"मान्यता के लिए आवेदन न करने वाले मदरसों को बंद करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से इन मदरसों को बंद करवाएंगे। राज्य में ऐसे 200 से अधिक मदरसे हैं जिन्होंने आवेदन नहीं किया है।"
— डॉ. पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
