उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों पर अब ड्रोन-सैटेलाइट से 24×7 नजर; खतरे से पहले बजेगा अलार्म, अलर्ट पर आपदा तंत्र

देहरादून: उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलती हिमालयी परिस्थितियों के बीच ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) से बनने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए राज्य सरकार हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार और जलभराव में होने वाले बदलावों पर अब 24 घंटे रियल टाइम नजर रखी जाएगी। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके साथ ही, संवेदनशील व संभावित खतरे वाले निचले इलाकों में 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' (पूर्व चेतावनी प्रणाली) स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में समय रहते लोगों को अलर्ट किया जा सके।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन की तैयारियों का पूरा खाका खींचा गया।
हाईटेक निगरानी के 4 प्रमुख साधन
सैटेलाइट इमेजरी: दूरस्थ हिमालयी ग्लेशियरों के आकार और झीलों के फैलाव का नियमित डेटा जुटाया जाएगा।
रिमोट सेंसिंग तकनीक: झीलों में पानी की मात्रा और उसके दबाव का वैज्ञानिक विश्लेषण होगा।
ड्रोन सर्वे: दुर्गम और पहुंच से बाहर वाले इलाकों में झीलों की वास्तविक स्थिति की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ली जाएंगी।
सेंसर व अर्ली वार्निंग सिस्टम: जलस्तर अचानक बढ़ने पर निचले इलाकों में ऑटोमैटिक अलार्म और सायरन से चेतावनी जारी होगी।
बारिश को लेकर राज्यभर में 24×7 अलर्ट
प्रदेश में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। बैठक में नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, बिजली-पानी और संचार नेटवर्क की समीक्षा की गई।
रास्तों पर तुरंत एक्शन: बार-बार सड़क बंद होने और लैंडस्लाइड वाले संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही जेसीबी (JCB), पोकलैंड और तकनीकी दल तैनात रहेंगे, ताकि मार्ग अवरुद्ध होते ही तत्काल खोला जा सके।
जलभराव से निपटने की तैयारी: प्रभावित क्षेत्रों में पानी निकासी के लिए वाटर पंप और अतिरिक्त उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। आवश्यक सेवाएं बाधित होने पर बैकअप टीमें तुरंत मौके पर पहुंचेंगी।
राशन-दवाइयों का एडवांस स्टॉक: दूरस्थ और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में संपर्क कटने की आशंका को देखते हुए खाद्यान्न, जरूरी दवाइयां और ईंधन का पर्याप्त भंडारण पहले ही करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम और सड़क की स्थिति देखकर ही चलेगी यात्रा
चारधाम और अन्य यात्रा मार्गों पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मौसम खराब होने या भारी बारिश के दौरान यात्रियों को जोखिम भरे रास्तों पर जाने की अनुमति नहीं होगी। अत्यधिक बारिश या मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाएगा और सभी बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी। हालात सामान्य होने के बाद ही आगे की यात्रा शुरू कराई जाएगी।
राहत और बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD), विद्युत और खाद्य आपूर्ति विभाग को आपस में 100% समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
