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हिंदू कुश हिमालय में बढ़ा GLOF का खतरा, 407 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील; सिक्किम की 7 झीलों पर भी चिंता

31 August 2026

AI News Reader

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हिंदू कुश हिमालय में बढ़ा GLOF का खतरा, 407 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील; सिक्किम की 7 झीलों पर भी चिंता

नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (UNU) के नेतृत्व में हुई एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी में पूरे हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 407 ऐसी ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है, जिनके फटने का खतरा है।

संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय-इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड ह्यूमन सिक्योरिटी (UNU-EHS), बॉन के ग्लेशियर वैज्ञानिक दीपेश चपागाइन के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में सबसे पुराने उपलब्ध रिकॉर्ड से लेकर 2024 तक की 493 GLOF घटनाओं का विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन के मुताबिक, 1950 के बाद हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में GLOF आपदाओं की औसत संख्या प्रति दशक 7 से बढ़कर 38 हो गई है। यानी कुछ दशकों में इन घटनाओं में करीब पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

रिसर्च रिपोर्ट ‘Glacial Lake Outburst Flood Risks, Response Strategies and Adaptation Gaps in the Hindu Kush Himalaya Region’ में चेतावनी दी गई है कि GLOF पूरे HKH क्षेत्र के लिए एक बड़ा और लगातार बढ़ता खतरा बन चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान के चलते ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं। इसके कारण ग्लेशियरों के आसपास नई झीलें बन रही हैं और मौजूदा ग्लेशियल झीलों का आकार भी बढ़ रहा है। इन झीलों पर भूस्खलन, भूकंप या अचानक अत्यधिक पानी आने जैसी घटनाओं का दबाव पड़ने पर इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

झील के टूटने पर बड़ी मात्रा में पानी और मलबा बेहद तेज गति से निचले इलाकों की ओर आता है, जिससे अचानक विनाशकारी बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

अध्ययन में 1835 से 2025 के बीच अलग-अलग देशों में दर्ज GLOF घटनाओं का भी विश्लेषण किया गया है। आंकड़ों के अनुसार:

  • चीन: 199 GLOF घटनाएं
  • पाकिस्तान: 152 घटनाएं
  • भारत: 62 घटनाएं
  • नेपाल: 58 घटनाएं

हालांकि मौतों के मामले में भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां GLOF से 6,119 लोगों की मौत दर्ज की गई। वहीं चीन में 625 और पाकिस्तान में 1,991 मौतें रिकॉर्ड की गईं।

रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक दीपेश चपागाइन ने UN News को दिए इंटरव्यू में कहा कि नेपाल-चीन सीमा पर हुई हालिया बड़ी आपदा ने अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया है। उनके मुताबिक, नेपाल के अधिकारियों को बाढ़ की जानकारी तब मिली जब वह नेपाल की सीमा के करीब पहुंच रही थी।

इसके बाद टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया, फोन कॉल और अलार्म के जरिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया।

चपागाइन के अनुसार, GLOF के खतरे को कम करने के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियरों और अस्थिर ढलानों की लगातार निगरानी जरूरी है। इसके साथ ही सैटेलाइट मॉनिटरिंग, मौसम एवं नदी के जलस्तर की निगरानी और प्रभावी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत है, ताकि लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

GLOF का खतरा भारत के पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में भी गंभीर बना हुआ है। सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) के वाइस चेयरमैन डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार, राज्य में 85 ग्लेशियल झीलों को मैप किया गया है। इनमें से 17 झीलें बेहद संवेदनशील पाई गई हैं और इनमें ग्लेशियर रिट्रीट यानी ग्लेशियर के पीछे हटने की स्थिति देखी जा रही है।

इन 17 संवेदनशील झीलों में से 7 ऐसी ग्लेशियल झीलें हैं, जो बड़े भूकंप या क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाओं के कारण टूट सकती हैं। इनके टूटने पर सिक्किम में GLOF की बड़ी आपदा का खतरा पैदा हो सकता है।

हिमालय भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। बड़े भूकंप के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन हो सकता है। यदि ऐसा भूस्खलन किसी ग्लेशियल झील में गिरता है, तो झील में अचानक पानी का दबाव बढ़ सकता है और बांध जैसी प्राकृतिक संरचना टूट सकती है। इससे नीचे की ओर तेज रफ्तार से बाढ़ और मलबे का प्रवाह शुरू हो सकता है।

इसी तरह क्लाउडबर्स्ट के दौरान अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने से भी ग्लेशियल झीलों पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र की नदियां और ग्लेशियर कई देशों की सीमाओं को पार करते हैं। ऐसे में केवल किसी एक देश की तैयारी पर्याप्त नहीं होगी। चीन, नेपाल, भारत और निचले इलाकों में बसे अन्य देशों के बीच ग्लेशियरों, झीलों, मौसम और नदी के जलस्तर से जुड़े डेटा का नियमित और सक्रिय आदान-प्रदान जरूरी है।

2022 में IPCC की रिपोर्ट ने भी हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों और GLOF के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। अब नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस खतरे के बढ़ते पैमाने को आंकड़ों के साथ सामने रखा है। 407 संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की पहचान इस बात का संकेत है कि हिमालयी राज्यों में निगरानी, अर्ली वॉर्निंग और आपदा प्रबंधन की तैयारी को और मजबूत करने की जरूरत है।