उत्तराखंड 'शुद्धिकरण' विवाद: बेंगलुरु में BJP नेताओं के खिलाफ जीरो FIR दर्ज

बेंगलुरु: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में किए गए कथित "शुद्धिकरण अनुष्ठान" का विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में अब बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में उत्तराखंड के भाजपा नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ 'जीरो एफआईआर' दर्ज की गई है। इस घटना को लेकर देशभर में अब तक कम से कम 8 स्थानों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
पुलिस ने कानूनी राय लेने के बाद 4 सितंबर को मामला दर्ज किया। यह एफआईआर निम्नलिखित कानूनों के तहत दर्ज की गई है:
- नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955: धारा 7(1)(c), 7(1)(d) और 7(1)(e)
- SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989: धारा 3(1)(u)
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 196(1)(b) (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य और शत्रुता को बढ़ावा देना)
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?
कांग्रेस की एसटी (अनुसूचित जनजाति) इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा ने 31 अगस्त को बेंगलुरु पुलिस को शिकायत सौंपी थी।
- शिकायत के अनुसार, हल्द्वानी में 8 अगस्त को खड़गे की जनसभा हुई थी।
- आरोप है कि 10 अगस्त को स्थानीय भाजपा नेताओं ने यह मानते हुए मैदान में 'शुद्धिकरण पूजा' कराई कि खड़गे के अनुसूचित जाति (दलित) से होने के कारण मैदान अपवित्र हो गया था।
- शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीडिया के सामने इस कदम का समर्थन किया था।
खड़गे ने की थी 'महाड सत्याग्रह' से तुलना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को संसद (राज्यसभा) में यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्होंने सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर एफआईआर में देरी पर सवाल खड़े किए थे।
खड़गे ने कहा कि यह कृत्य संविधान की मूल भावना और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इस घटना को सीधे तौर पर छुआछूत से जोड़ते हुए इसकी तुलना डॉ. बी.आर. अंबेडकर के 1927 के ऐतिहासिक 'महाड सत्याग्रह' से की, जो सार्वजनिक तालाब से पानी पीने के अधिकार के लिए लड़ा गया था।
राहुल गांधी पर भी दर्ज हो चुकी है FIR
उधर, हल्द्वानी पुलिस ने इस मामले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान को जातिवादी रंग देने की कोशिश की। वहीं, कांग्रेस ने राहुल गांधी पर दर्ज केस को मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की भाजपा की साजिश करार दिया है।
