आत्मनिर्भर भारत को मजबूती: अदाणी डिफेंस बनाएगी AK-203 का गोला-बारूद, इंडो-रशियन राइफल्स से मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बड़ी मजबूती मिली है। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना की AK-203 असॉल्ट राइफल के लिए स्वदेशी 7.62x39 mm छोटे कैलिबर वाले गोला-बारूद (एम्युनिशन) की सप्लाई के लिए इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ 5 साल का अहम समझौता किया है।
इस साझेदारी के तहत AK-203 राइफलों के निर्माण और उसके गोला-बारूद की सप्लाई चेन पूरी तरह से देश के भीतर, खासतौर पर उत्तर प्रदेश में ही स्थापित और संचालित होगी।
कानपुर प्लांट में तैयार होगा गोला-बारूद
समझौते के मुताबिक, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस असॉल्ट राइफलों के लिए एम्युनिशन की मांग को पूरा करने के लिए अपनी मौजूदा क्षमताओं का उपयोग करेगी। इसके तहत कंपनी के कानपुर (उत्तर प्रदेश) स्थित अत्याधुनिक गोला-बारूद प्लांट में 7.62x39 mm राउंड्स का निर्माण किया जाएगा। इससे भारतीय सेना को विदेशी सप्लायर्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और हथियारों के लिए लगातार बैकअप उपलब्ध रहेगा।
अमेठी के कोरवा में बन रही हैं 6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफलें
दिसंबर 2021 में हुआ था रक्षा सौदा: रक्षा मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा प्लांट में कुल 6,01,427 AK-203 असॉल्ट राइफलों के उत्पादन के लिए IRRPL के साथ औपचारिक अनुबंध किया था।
इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन: अब अमेठी में राइफल बनेगी और कानपुर से उसका गोला-बारूद मिलेगा, जिससे पूरी सप्लाई चेन घरेलू स्तर पर सुरक्षित हो जाएगी।
क्या है IRRPL और कौन-कौन हैं इसमें साझीदार?
इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) का गठन 2019 में भारत-रूस अंतर-सरकारी समझौते के तहत किया गया था। यह एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है, जिसमें निम्नलिखित कंपनियां शामिल हैं:
- भारतीय शेयरधारक: एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL)।
- रूसी शेयरधारक: कंसर्न कलाश्निकोव (Concern Kalashnikov) और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (Rosoboronexport)।
इस समझौते से क्या लाभ होगा?
- विदेशी निर्भरता खत्म: युद्ध या आपातकाल जैसी परिस्थितियों में सेना को विदेशी हथियारों या गोला-बारूद की सप्लाई लाइन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- सप्लाई की निरंतरता: 5 साल के इस करार से सेना को गोला-बारूद की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित होगी।
- डिफेंस कॉरिडोर को रफ्तार: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (कानपुर और अमेठी) देश के छोटे हथियारों और रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
