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मेरठ की बेटी रूपल चौधरी बनीं नायब सूबेदार, सेना में यह मुकाम पाने वाली उत्तर प्रदेश की पहली महिला एथलीट

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom17 September 2026

AI News Reader

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मेरठ की बेटी रूपल चौधरी बनीं नायब सूबेदार, सेना में यह मुकाम पाने वाली उत्तर प्रदेश की पहली महिला एथलीट

मेरठ: मेरठ की स्टार एथलीट रूपल चौधरी को भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सीधी नियुक्ति मिली है। इसके साथ ही वह सेना में यह मुकाम हासिल करने वाली उत्तर प्रदेश की पहली महिला एथलीट बन गई हैं। खेल के मैदान से वर्दी तक का यह सफर प्रदेश की तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है।

नियुक्ति की खबर मिलने के बाद रूपल ने कहा कि अब वह वर्दी में देश की सेवा करेंगी। मेरठ जैसे शहर से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली इस खिलाड़ी की उपलब्धि पर परिवार, प्रशिक्षकों और खेल जगत की ओर से बधाइयों का सिलसिला जारी है।

खेल और सेना का पुराना रिश्ता

भारतीय सेना लंबे समय से उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति देकर उनके खेल करियर को स्थायित्व देती रही है। इस व्यवस्था का लाभ यह होता है कि खिलाड़ी को आर्थिक सुरक्षा के साथ अनुशासित प्रशिक्षण का माहौल मिलता है और वह बिना किसी दबाव के अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। पुरुष खिलाड़ियों के लिए यह राह वर्षों से खुली रही है, लेकिन महिला एथलीटों के लिए यह अपेक्षाकृत नया अध्याय है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मेरठ का इलाका खेल प्रतिभाओं की पौध के लिए जाना जाता है। यहां के अखाड़े, स्टेडियम और स्कूली मैदान लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करते आए हैं। खेल सामग्री के निर्माण के लिए भी यह शहर देश भर में पहचाना जाता है।

बेटियों के लिए बड़ा संदेश

किसी महिला एथलीट का सेना में नायब सूबेदार बनना सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह उन परिवारों के लिए भी संदेश है, जो बेटियों को मैदान तक भेजने में झिझकते हैं। जब खेल के साथ सम्मानजनक करियर जुड़ जाता है, तो अभिभावकों का भरोसा बढ़ता है और गांव-कस्बों से अधिक लड़कियां प्रशिक्षण के लिए आगे आती हैं।

बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेल ढांचे पर निवेश बढ़ाया है। जिलों में स्टेडियम, छात्रावास और प्रशिक्षण केंद्र तैयार किए जा रहे हैं, ताकि प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर ही सही मार्गदर्शन मिल सके।

रूपल की इस उपलब्धि को प्रदेश के खेल जगत में एक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे प्रेरित होकर और भी खिलाड़ी अनुशासित सेवाओं की ओर रुख करेंगी और मैदान के साथ वर्दी में भी अपनी पहचान बनाएंगी।