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टाटा संस के IPO का रास्ता साफ: RBI ने NBFC पंजीकरण सरेंडर करने की अर्जी खारिज की; शेयर बाजार में लिस्टिंग होगी अनिवार्य

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom13 September 2026

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टाटा संस के IPO का रास्ता साफ: RBI ने NBFC पंजीकरण सरेंडर करने की अर्जी खारिज की; शेयर बाजार में लिस्टिंग होगी अनिवार्य

मुंबई। टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) के शेयर बाजार में सूचीबद्ध (List) होने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (प्रमुख निवेश कंपनी) के रूप में टाटा संस के एनबीएफसी (NBFC) पंजीकरण को वापस लेने/रद्द करने के आवेदन को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख के बाद अब देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने की होल्डिंग कंपनी के लिए स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होना नियामकीय रूप से अनिवार्य हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई ने अपने इस फैसले की जानकारी शनिवार को टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को भेजे गए एक औपचारिक पत्र के जरिए दी है। इसके साथ ही मार्च 2024 से लंबित पंजीकरण वापसी की अर्जी का निपटारा हो गया है।

आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ 'अपर-लेयर' (Upper-Layer) एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के तहत, अपर-लेयर श्रेणी में आने वाली किसी भी संस्था के लिए वर्गीकरण की तारीख से तीन साल के भीतर यानी 30 सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था।

टाटा संस इस सार्वजनिक लिस्टिंग के दायित्व से बचना चाहती थी। इसके लिए कंपनी ने वर्ष 2024 में रणनीतिक कदम उठाते हुए 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का अपना पूरा कर्ज चुका दिया था, ताकि वह तकनीकी रूप से कर्जमुक्त होकर एनबीएफसी पंजीकरण सरेंडर कर सके। हालांकि, आरबीआई ने इस आवेदन पर अपना फैसला लंबे समय तक लंबित रखा और लगातार जारी होने वाली अपर-लेयर एनबीएफसी की सूची में टाटा संस का नाम बनाए रखा।

जून 2026 से प्रभावी आरबीआई के संशोधित नियमों के मुताबिक, यदि किसी भी एनबीएफसी की परिसंपत्तियां (Assets) 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक हो जाती हैं, तो वह स्वतः ही 'अपर-लेयर' श्रेणी में आ जाती है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, टाटा संस की कुल परिसंपत्तियां 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई हैं।

हाल ही में अगस्त में केंद्रीय बैंक द्वारा जारी अपर-लेयर सूची में शामिल कुल 17 संस्थाओं में टाटा संस ही एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी थी। बाकी गैर-सूचीबद्ध इकाइयों में आरईसी (REC), पीएफसी (PFC) और आईआरएफसी (IRFC) जैसी सरकारी एनबीएफसी शामिल हैं, जिन्हें नियमों के तहत सूचीबद्धता से विशेष छूट हासिल है।

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर प्रमुख शेयरधारकों के बीच लंबे समय से दोफाड़ स्थिति बनी हुई है:

टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts): नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले 'टाटा ट्रस्ट्स' के पास कंपनी की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। ट्रस्ट्स लगातार लिस्टिंग का विरोध करता रहा है, क्योंकि बाजार में आने से सार्वजनिक जांच, वित्तीय खुलासे और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर कई सख्त नियमों का पालन करना पड़ेगा।

शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप: कंपनी में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला मिस्त्री परिवार (एसपी ग्रुप) हमेशा से लिस्टिंग के पक्ष में रहा है। लिस्टिंग होने से एसपी ग्रुप को अपनी हिस्सेदारी का पारदर्शी बाजार मूल्य मिलेगा और नकदी संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

यह बड़ा फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि फरवरी 2027 में अपना वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे अगले कार्यकाल की मांग नहीं करेंगे। ऐसे में नए नेतृत्व के आने से पहले कंपनी के पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होना काफी अहम माना जा रहा है।

आरबीआई की तरफ से अर्जी खारिज होने का अर्थ यह है कि टाटा संस को अब अपर-लेयर के तहत लिस्टिंग प्रोटोकॉल का पालन करना ही होगा। हालांकि, यह अभी सीधे तौर पर आईपीओ की औपचारिक घोषणा नहीं है। कंपनी प्रबंधन और बोर्ड को अब सार्वजनिक निर्गम (IPO) के समय, साइज, वैल्यूएशन और स्ट्रक्चर पर फैसला लेना होगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि टाटा संस बाजार में उतरती है, तो यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है।