भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम चरण में, जल्द हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान: वाणिज्य सचिव

हाइलाइट्स:
- मुंबई में 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का बड़ा बयान।
- तकनीकी और रणनीतिक मुद्दों पर सहमति बनते ही आधिकारिक हस्ताक्षर की संभावना।
- सेवा निर्यात में केवल आईटी (IT/ITES) पर निर्भरता घटाने और विविधता लाने की सलाह।
- 670 अरब डॉलर के वैश्विक वित्तीय सेवा बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 8 अरब डॉलर (लगभग 1%)।
मुंबई: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) को लेकर आर्थिक कूटनीति के मोर्चे पर बड़ी प्रगति हुई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित यह व्यापार समझौता अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है और बहुत जल्द इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' में दिया बड़ा बयान
वाणिज्य सचिव ने यह महत्वपूर्ण जानकारी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ के एक विशेष सत्र के दौरान दी। उन्होंने कहा कि दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापक आर्थिक हितों को संतुलित करना जरूरी होता है। वर्तमान में कुछ तकनीकी और रणनीतिक बिंदुओं पर दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है, जिन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। औपचारिकताएं पूरी होते ही उचित समय पर इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
सेवा निर्यात में केवल IT पर निर्भरता से आगे सोचना होगा
संबोधन के दौरान वाणिज्य सचिव ने केवल व्यापार समझौते तक सीमित न रहकर भारतीय सर्विस सेक्टर के भविष्य पर भी स्पष्ट रोडमैप पेश किया। उन्होंने चेताया कि यदि देश की आर्थिक वृद्धि को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है, तो पारंपरिक सोच से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से आह्वान किया कि केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर निर्भर रहने का समय अब बीत चुका है। भारत को अपने सेवा निर्यात (Services Export) के दायरे में विविधता लानी होगी।
670 अरब डॉलर के बाजार में भारत की हिस्सेदारी मात्र 1%
वाणिज्य सचिव ने वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की विशाल संभावनाओं और भारत की मौजूदा स्थिति को लेकर आंकड़े साझा किए:
- वैश्विक वित्तीय सेवा बाजार: लगभग 670 अरब अमेरिकी डॉलर।
- भारत की वर्तमान हिस्सेदारी: मात्र 8 अरब अमेरिकी डॉलर।
- वैश्विक हिस्सेदारी प्रतिशत: कुल बाजार का लगभग 1.2% (एक फीसदी से कुछ अधिक)।
इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक वित्तीय सेवाओं में भारत के पास अपनी पैठ मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें भुनाने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है।
फिनटेक स्टार्टअप्स को ग्लोबल विस्तार की जरूरत
वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत के फिनटेक स्टार्टअप्स ने दुनिया भर में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की है। इसके बावजूद वैश्विक संस्थागत वित्तीय बाजार में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। उन्होंने देश के वित्तीय और तकनीकी दिग्गजों को सुझाव दिया कि वे केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में आक्रामक हिस्सेदारी हासिल करने की रणनीति बनाएं।
व्यापारिक गलियारों में उत्साह
वाणिज्य सचिव के इस बयान के बाद व्यापारिक और कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुहर लगते ही तकनीक, कृषि, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में द्विपक्षीय व्यापार को नया पंख मिलेगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते नए मुकाम पर पहुंचेंगे।
