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ऋषिकेश: रामझूला पुल के जीर्णोद्धार का 60% काम पूरा, कुंभ से पहले जनवरी 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य

By Alpana Dwivedi13 September 2026

AI News Reader

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ऋषिकेश: रामझूला पुल के जीर्णोद्धार का 60% काम पूरा, कुंभ से पहले जनवरी 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र को आपस में जोड़ने वाले ऐतिहासिक रामझूला पुल के जीर्णोद्धार एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की देखरेख में कराए जा रहे इस मरम्मत कार्य का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया गया है। विभागीय योजना के अनुसार, आगामी कुंभ मेले में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए निर्माणदायी एजेंसी को जनवरी 2027 तक पुल को आवागमन के लिए पूरी तरह तैयार करने का कड़ा लक्ष्य दिया गया है।

हालांकि, एक तरफ जहां काम में तेजी लाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ गंगा के उफान के बीच जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

पुराने डेक को काटकर लगाया जा रहा नया डेक

वर्ष 1985 में निर्मित करीब 220 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े रामझूला पुल की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। अब पुल के पुराने और जर्जर हो चुके डेक को छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर हटाया जा रहा है और उसकी जगह अत्याधुनिक नया डेक स्थापित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पुल के खंभों (पिलर्स) की मजबूती और भविष्य में बाढ़ के दबाव से सुरक्षा के लिए जरूरी सिविल कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।

पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र की दृष्टि से यह पुल बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी के मद्देनजर एजेंसी को जनवरी 2027 की समयसीमा दी गई है, ताकि कुंभ शुरू होने से पहले स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इसे पूरी तरह सुरक्षित आवागमन योग्य बना दिया जाए।

25 जुलाई से बंद है पुल, वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर हैं लोग

उल्लेखनीय है कि सुरक्षा ऑडिट और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने 25 जुलाई को रामझूला पुल पर पर्यटकों और आम जनता की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी थी। पिछले कई महीनों से पुल बंद रहने के कारण स्वर्गाश्रम और मुनिकीरेती के बीच आने-जाने वाले स्थानीय व्यापारियों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों को जानकी झूला या अन्य वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

गंगा की जलधारा के ऊपर जोखिम, बिना सेफ्टी गियर दिखे मजदूर

मरम्मत कार्य में तेजी के बीच कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला भी तूल पकड़ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंगा नदी के तेज बहाव के ठीक ऊपर पुल के पुराने भारी-भरकम लोहे के डेक को काटने जैसा जानलेवा काम कर रहे मजदूर बिना लाइफ जैकेट, हेलमेट और आवश्यक सेफ्टी हार्नेस (सुरक्षा बेल्ट) के कार्य करते देखे गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। शिकायत के बावजूद ठेकेदार और संबंधित विभाग द्वारा सुरक्षा उपकरणों के अनिवार्य उपयोग को लेकर ढिलाई बरती जा रही है।

दूसरी ओर, इस मामले पर विभागीय अधिकारियों का दावा है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं और ठेकेदार को मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाबंद किया जा रहा है।