’राई’ की थाप लेकर दुनिया के मंच तक पहुंचीं ’राधा’

"संतोष यादव, सुल्तानपुर"
बुंदेलखंड की पहचान सिर्फ किलों, वीरगाथाओं और सूखे पठारों से नहीं है। इस धरती की अपनी एक जीवंत सांस्कृतिक धड़कन भी है, जो ढोलक की थाप, लोकगीतों और राई नृत्य की लय में सुनाई देती है। इसी धड़कन को देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं झांसी की लोक कलाकार बुंदेली राई नृत्यांगना राधा प्रजापति।
राई बुंदेलखंड की पारंपरिक लोकनृत्य शैली है। राधा इस कला को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित न रखकर बड़े स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश कर रही हैं। उनके लिए राई महज नृत्य नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की मिट्टी और संस्कृति को पहचान दिलाने का माध्यम है। राधा के नृत्य की मुख्य विधा बुंदेली राई है। वहीं कथक, गायन, मॉडलिंग, फैशन शो, एल्बम शूट, और अभिनय में भी उनकी खास रुचि है। ’सन ऑफ भोजपुरिया’ फिल्म में वे लीड रोल में रहीं। मंच की चमक तक पहुंचने की राधा की राह आसान नहीं रही।
उनकी कहानी मंच की चमक से शुरू नहीं होती। एक भाई तीन बहनों में सबसे छोटी राधा के जीवन में संघर्ष पहले आया और मंच बाद में। कम उम्र में ही उन्होंने नृत्य सीखना शुरू किया। पिता के अलग रहने से परिवार आर्थिक संकट में था। पूरा कुनबा मुफलिसी से जंग लड़ रहा था। माता ने बच्चों के पालन-पोषण के लिए खूब परिश्रम किया। ऐसे दौर में राधा ने अपनी कला को ही आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए परिवार को आर्थिक संकट से उबारा।
संघर्ष से निकली उनकी यह यात्रा आज लोककला को पहचान दिलाने के मिशन में बदल चुकी है। राधा अपने समूह के साथ बुंदेली राई की प्रस्तुतियां देती हैं। पारंपरिक राई की मूल आत्मा को कायम रखते हुए उन्होंने मंचीय प्रस्तुति, वेशभूषा और आधुनिक माध्यमों को भी इसमें जोड़ा है। यही वजह है कि उनकी प्रस्तुति में परंपरा और नए दौर का मेल दिखाई देता है।नृत्य के अलावा राधा मॉडलिंग भी कर चुकी हैं और भोजपुरी फिल्म में अभिनय का अनुभव भी उनके खाते में दर्ज है। राधा के कला सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव अंतरराष्ट्रीय मंच रहे हैं।
दिसंबर 2021 में उनके समूह ने दुबई एक्सपो में बुंदेली राई सहित बुंदेलखंड की लोककलाओं की प्रस्तुति दी। वर्ष 2022 में थाईलैंड फिर नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और 2025 में मलेशिया में भी उन्होंने राई की प्रस्तुति देकर बुंदेली संस्कृति की छाप छोड़ी। दुबई और थाईलैंड में समूह के साथ प्रस्तुति देने वाली राधा ने मलेशिया में अकेले सेमी-क्लासिकल राई नृत्य प्रस्तुत किया।
राई की यह थाप बताती है कि लोककला अपनी जड़ों से जुड़ी रहे और प्रस्तुति में समय के अनुरूप नयापन आए तो उसका दायरा गांव-कस्बों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है। राधा की कोशिश सिर्फ स्वयं मंच पर बने रहने की नहीं है। नई पीढ़ी को लोककला से जोड़ने के लिए उनके समूह की ओर से बच्चों को राई नृत्य का प्रशिक्षण देने की पहल भी की जा रही है। आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक लोककलाओं के सामने कलाकारों और दर्शकों की कमी की चुनौती है। ऐसे में राधा जैसी कलाकार परंपरा और नई पीढ़ी के बीच एक कड़ी का काम कर रही हैं।
अब उनकी नजर फिल्मों, वेब सीरीज और बड़े मंचों पर बुंदेली लोककला को जगह दिलाने पर है। बुंदेली भाषा में अपना एल्बम तैयार करना भी उनके लक्ष्यों में शामिल है। राधा के लिए राई सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। ऐसी संभावना जिसमें बुंदेलखंड की मिट्टी की खुशबू दुनिया के मंच तक पहुंच सके।
गायन, मॉडलिंग व अभिनय के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं राधा प्रजापति
बुंदेलखंड की राधा का सपना बुंदेली लोककला को फिल्मों, वेब सीरीज और बड़े मंचों तक पहुंचाने के साथ बुंदेली भाषा में अपना एल्बम तैयार करना है। उनके लिए बुंदेली राई महज लोकनृत्य नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है। राई को मुख्य विधा बनाकर वह अपने समूह के साथ देश-विदेश के मंचों पर बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति की छटा बिखेर रही हैं। दुबई, थाईलैंड, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया में राई की प्रस्तुति दे चुकीं राधा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुंदेली लोककला की पहचान को विस्तार दिया है।
राधा ने कथक का प्रशिक्षण भी लिया है और गायन, मॉडलिंग व अभिनय के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। भोजपुरी फिल्म में अभिनय के साथ मंचीय कार्यक्रमों और रिकॉर्डिंग में गायन का अनुभव उनके बहुआयामी कला सफर को दर्शाता है। राई की प्रस्तुति को आकर्षक बनाने के लिए वेशभूषा तैयार करने और मंचीय प्रस्तुति में नए प्रयोग करने में भी उनकी रुचि है। लोककला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए बच्चों को राई नृत्य का प्रशिक्षण देने की पहल भी उनके समूह की ओर से की जा रही है।
राष्ट्रपति भवन से दूरदर्शन तक राधा के राई की गूंज
बुंदेली राई को देश-दुनिया के मंचों तक पहचान दिलाने वाली राधा प्रजापति राष्ट्रपति भवन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में अपनी प्रस्तुति से वाहवाही बटोर चुकी हैं। उनके राई नृत्य की खूबियों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सियासी जगत की कई शख्सियतें भी सराहना कर चुके हैं। राधा की कला और बुंदेली राई की विशिष्टता पर दूरदर्शन तथा उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से कई डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जा चुकी हैं।
"बुंदेलखंड की लोक विधाओं में राई की खास पहचान है।बुंदेलखंड में लोकगीत और लोकनृत्य की 51 से अधिक लोक विधाएं प्रचलित हैं। इनमें राई को विशेष स्थान प्राप्त है। लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति में बुंदेलखंड की समृद्ध लोक परंपरा की कई विधाएं शामिल हैं। इनमें राई के साथ श्रृंगार नृत्य, ढिमरयाई, नौरता, बधाई नृत्य और जोगनी प्रमुख हैं। इन लोक विधाओं के जरिए बुंदेलखंड की संस्कृति, परंपरा और लोक जीवन मंच पर जीवंत होता है। - राधा प्रजापति, राई नृत्यांगना "
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