100 करोड़ के मानहानि मामले में एम एस धोनी को नोटिस, 9 अक्टूबर तक देना होगा जवाब, जानें क्या है पूरा मामला

चेन्नईः मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सेवानिवृत्त आईपीएस (IPS) अधिकारी जी. संपत कुमार द्वारा दायर तीन नई याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने धोनी को अपना पक्ष रखने के लिए 9 अक्टूबर तक का समय दिया है।
न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाओं पर धोनी को जवाब दाखिल करने की मोहलत दी और अगली सुनवाई तब तक के लिए स्थगित कर दी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2013 के आईपीएल (IPL) स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी कांड से जुड़ा है। उस दौरान एक निजी टेलीविजन डिबेट में पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार ने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कप्तान एमएस धोनी पर सट्टेबाजी विवाद में शामिल होने के आरोप लगाए थे।
इन आरोपों से आहत होकर महेंद्र सिंह धोनी ने साल 2014 में मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। धोनी ने संपत कुमार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया था कि उनके बयानों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।
गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट पहले ही सीडी व अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के लिप्यंतरण (लिखित रूप में बदलने) का निर्देश दे चुका है। इसके तहत पिछले साल फरवरी में अदालत ने धोनी को दस्तावेजों के अनुवाद व टाइपिंग शुल्क के रूप में 10 लाख रुपये जमा कराने का भी आदेश दिया था।
संपत कुमार की तीन नई याचिकाओं में क्या मांगें हैं?
मामले में अब रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार ने अदालत में तीन नई हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल कर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति: कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर जयश्री की मौजूदगी में धोनी के बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी तैनात किया जाए।
- पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग: गवाहों के बयान और पूरी सुनवाई की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा इसकी एक-एक प्रति उन्हें और कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी को सौंपी जाए।
- सरकारी परिसर में हो गवाही: चूंकि धोनी एक बेहद लोकप्रिय और चर्चित क्रिकेटर हैं, इसलिए उनकी गवाही किसी निजी स्थान या स्टार होटल में दर्ज न की जाए। यह सुनवाई केवल अदालत परिसर या किसी उपयुक्त सरकारी भवन में ही आयोजित की जानी चाहिए।
मद्रास उच्च न्यायालय अब इन सभी मांगों पर धोनी का जवाब आने के बाद 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा।
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