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इसरो ने स्वदेशी उपकरणों के लिए मंगाए प्रस्ताव, पांच केंद्रों ने जारी किए अलग-अलग टेंडर

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom21 September 2026

AI News Reader

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इसरो ने स्वदेशी उपकरणों के लिए मंगाए प्रस्ताव, पांच केंद्रों ने जारी किए अलग-अलग टेंडर

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने अभियानों में इस्तेमाल होने वाले कई अहम उपकरणों के स्वदेशी निर्माण के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। संगठन के पांच अलग-अलग केंद्रों ने इसके लिए टेंडर जारी किए हैं। कोशिश यह है कि जिन कलपुर्जों के लिए अब तक बाहर पर निर्भरता रही है, उन्हें देश में ही तैयार कराया जा सके।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने रॉड एंड बेयरिंग के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने दो अलग-अलग टेंडर निकाले हैं, जिनमें एक वाइब्रेशन टेस्ट फिक्सचर के लिए है और दूसरा फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण एवं परीक्षण के लिए।

किस केंद्र ने क्या मांगा

जारी किए गए टेंडर का ब्योरा इस प्रकार है:

  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र: रॉड एंड बेयरिंग
  • यूआर राव सैटेलाइट सेंटर: वाइब्रेशन टेस्ट फिक्सचर
  • यूआर राव सैटेलाइट सेंटर: फ्लाइट सोलर पैनल का निर्माण एवं परीक्षण
  • सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र: एचपीएस3 एक्सियल थ्रस्ट मापन प्रणाली
  • अंतरिक्ष संचार केंद्र: एक्स बैंड सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर

रॉड एंड बेयरिंग के लिए जारी टेंडर में विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं और उनके एजेंटों को बोली लगाने से बाहर रखा गया है। यानी इस उपकरण के लिए केवल घरेलू निर्माता ही प्रस्ताव दे सकेंगे।

घरेलू उद्योग के लिए मौका

अंतरिक्ष कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता जांच बेहद कड़ी होती है, क्योंकि इन्हें प्रक्षेपण के समय भारी कंपन और अंतरिक्ष में तापमान के तीव्र उतार-चढ़ाव को झेलना पड़ता है। वाइब्रेशन टेस्ट फिक्सचर जैसे उपकरण इसी परीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिनमें उपग्रह के हिस्सों को प्रक्षेपण जैसी परिस्थितियों में परखा जाता है।

सोलर पैनल उपग्रह की ऊर्जा व्यवस्था का आधार होते हैं और इनकी विश्वसनीयता पर पूरे मिशन की अवधि निर्भर करती है। इसी तरह एक्स बैंड उपकरण जमीन से उपग्रह तक संकेत भेजने और प्राप्त करने की प्रणाली से जुड़े हैं।

घरेलू कंपनियों के लिए यह अंतरिक्ष क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला में जगह बनाने का अवसर माना जा रहा है। बीते वर्षों में निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ी है और कई इकाइयां अब उपग्रह तथा प्रक्षेपण यान के हिस्से बनाने लगी हैं।