अब तक का सबसे कम उम्र का ग्रह खोजा गया, आयु दस लाख वर्ष से भी कम

नई दिल्ली। खगोल विज्ञानियों ने अब तक का सबसे कम उम्र का ग्रह खोजने का दावा किया है। एलियास 2-24 बी नाम के इस ग्रह की आयु दस लाख वर्ष से भी कम आँकी गई है। आकार में यह बृहस्पति जैसा है और पृथ्वी से करीब 450 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।
यह ग्रह अपने नवजात तारे की परिक्रमा ऐसी दूरी से कर रहा है, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी से 55 गुना अधिक है। इतनी दूरी पर इतने कम समय में इतने बड़े ग्रह का बन जाना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य है।
पुरानी धारणा को चुनौती
अब तक माना जाता रहा है कि बृहस्पति जैसे विशाल ग्रहों को बनने में कम से कम पचास लाख वर्ष लगते हैं। यह अवधि तब और बढ़ जाती है जब ग्रह अपने तारे से बहुत दूर बन रहा हो, क्योंकि वहाँ पदार्थ कम और बिखरा हुआ होता है। नई खोज इस धारणा पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
खोज की मुख्य बातें
- ग्रह की आयु दस लाख वर्ष से कम, आकार बृहस्पति के बराबर
- पृथ्वी से दूरी करीब 450 प्रकाश वर्ष
- तारे से दूरी, सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी से 55 गुना
यह अध्ययन चिली के यूनिवर्सिडाड डिएगो पोर्टालेस के आंद्रेया बर्नार्डी के नेतृत्व में किया गया और इसके निष्कर्ष 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में प्रकाशित हुए हैं।
नवजात तारों के चारों ओर गैस और धूल की तश्तरीनुमा संरचना बनती है, जिसे प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क कहा जाता है। ग्रह इसी डिस्क के पदार्थ से बनते हैं। तारे से जितनी अधिक दूरी होती है, वहाँ पदार्थ उतना ही कम घना होता है, इसलिए दूर बनने वाले ग्रहों को आकार लेने में अधिक समय लगने की बात कही जाती रही है।
इतनी कम उम्र के ग्रह का मिलना वैज्ञानिकों को यह समझने का अवसर देता है कि ग्रह निर्माण की प्रक्रिया शुरुआती दौर में कैसी दिखती है। आने वाले समय में इस तंत्र के और अवलोकन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विशाल ग्रह इतनी तेजी से कैसे बन जाते हैं।
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