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विश्व ओजोन दिवस: धरती के सुरक्षा कवच पर दुनिया का साझा प्रयास, मॉन्ट्रियल संधि से लौट रही ओजोन परत

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom17 September 2026

AI News Reader

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विश्व ओजोन दिवस: धरती के सुरक्षा कवच पर दुनिया का साझा प्रयास, मॉन्ट्रियल संधि से लौट रही ओजोन परत

नई दिल्ली: दुनिया भर में 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया गया। इस मौके पर विशेषज्ञों ने एक बार फिर याद दिलाया कि धरती के चारों ओर फैली ओजोन परत हमारे लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है और उसे बचाने के लिए मिलकर कदम बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।

ओजोन परत वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में मौजूद गैस की एक पतली चादर है, जो सूरज से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोक लेती है। यदि यह परत न हो तो ये किरणें सीधे धरती तक पहुंचें और मनुष्यों में त्वचा तथा आंखों की बीमारियां बढ़ें, फसलों की पैदावार घटे और समुद्री जीवन का संतुलन बिगड़ जाए।

एक संधि जिसने तस्वीर बदल दी

बीसवीं सदी के आठवें दशक में वैज्ञानिकों ने पाया कि अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत तेजी से पतली हो रही है। इसकी वजह रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, अग्निशमन उपकरण और स्प्रे में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायन थे। इसके बाद दुनिया के देशों ने मिलकर मॉन्ट्रियल संधि पर सहमति जताई और इन रसायनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का रास्ता तय किया।

यह संधि पर्यावरण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सबसे सफल मिसालों में गिनी जाती है। इसे दुनिया के लगभग सभी देशों का समर्थन मिला और तय समयसीमा में हानिकारक रसायनों का उत्पादन और उपयोग घटाया गया। वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आया है कि इसके परिणामस्वरूप ओजोन परत धीरे-धीरे भर रही है।

जानने योग्य बातें

  • हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है विश्व ओजोन दिवस
  • ओजोन परत रोकती है सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणें
  • मॉन्ट्रियल संधि के तहत हटाए गए ओजोन क्षरण वाले रसायन
  • अध्ययनों के अनुसार परत की स्थिति में लगातार सुधार

ओजोन परत की वापसी को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में उम्मीद की किरण के रूप में देखा जाता है। यह उदाहरण बताता है कि यदि वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर समय रहते साझा नीति बनाई जाए और देश उस पर अमल करें, तो वैश्विक स्तर की पर्यावरणीय समस्या को भी पलटा जा सकता है।

विशेषज्ञ आम लोगों से भी कुछ आसान कदम उठाने की अपील करते हैं। पुराने और खराब पड़े रेफ्रिजरेटर तथा एयर कंडीशनर का निपटान तय प्रक्रिया से कराना, उपकरणों की नियमित सर्विसिंग और ऊर्जा की बचत करने वाले उपकरण चुनना, इन सबका असर इसी दिशा में पड़ता है।