उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 20 हजार फर्जी आपत्तियां खारिज, 95 हजार मतदाताओं के नाम कटने तय; 3 अक्तूबर को आएगी अंतिम सूची

- बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ाया: ऊधमसिंह नगर में एक ही व्यक्ति के नाम से दर्ज हुई थीं 6000 आपत्तियां, निर्वाचन विभाग ने कीं निरस्त
- लापरवाही पड़ी भारी: नोटिस के बाद भी सुनवाई में नहीं पहुंचे 95 हजार लोग, अब नए सिरे से भरना होगा फॉर्म-6
- यूपी से मिलान: सीमावर्ती 5 जिलों में 'डीएसई विद पीएसई' अभियान जारी; दोहरी नागरिकता/वोट पर चल रही कैंची
देहरादून। उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का काम अंतिम चरण में है। इस दौरान जांच में करीब 20 हजार आपत्तियां पूरी तरह फर्जी पाई गई हैं, जिन्हें निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने खारिज कर दिया है। इन फर्जी आपत्तियों के खारिज होने से 20 हजार मतदाताओं के नाम कटने से बच गए हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला ऊधमसिंह नगर जिले में सामने आया, जहां एक ही मतदाता के नाम से करीब 6,000 आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिनमें से अधिकांश को जांच के बाद निरस्त कर दिया गया है।
निर्वाचन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पाया गया कि करीब 20,000 मामलों में आपत्तिकर्ता का नाम या उसका ईपिक (EPIC) नंबर गलत था। दुर्भावनापूर्ण तरीके से वैध मतदाताओं के नाम कटवाने के मकसद से ये शिकायतें दी गई थीं। ईआरओ व एईआरओ स्तर पर सूक्ष्म जांच के बाद इन्हें रद्द कर दिया गया। अब आयोग इस बात पर विचार कर रहा है कि ऐसे फर्जी आपत्तिकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए या नहीं।
एसआईआर अभियान के तहत पूरे प्रदेश से कुल 1 लाख 73 हजार फॉर्म-7 (नाम विलोपन के लिए) प्राप्त हुए हैं। इनमें ऐसे मतदाता भी शामिल हैं जिन्होंने खुद नाम कटवाने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, इनमें 95,000 ऐसे मतदाता हैं, जिनके नामों पर आपत्तियां आई थीं और नोटिस जारी होने के बावजूद वे सुनवाई में पेश नहीं हुए और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया।
ईआरओ ने इन सभी को अयोग्य की श्रेणी में डालकर इनके फॉर्म-7 की प्रक्रिया पूरी कर दी है। यानी इनके नाम कटना तय है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, यदि इनमें से किसी का वोट त्रुटिवश कट गया हो तो वह स्वतः नहीं जुड़ेगा; उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरकर नए सिरे से वोटर बनने के लिए आवेदन करना होगा।
प्रदेश में इन दिनों 'डीएसई विद पीएसई' (DSE with PSE) अभियान भी जोर-शोर से चल रहा है। इसके तहत उत्तराखंड के पांच सीमावर्ती जिलों के मतदाताओं का उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की मतदाता सूची से तकनीकी मिलान कराया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति का दोनों राज्यों में नाम दर्ज पाया जाता है, तो उसका एक वोट निरस्त कर दिया जाएगा।
प्रदेशभर में 3 अक्तूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान अब तक लगभग 13 लाख नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। कुल 24 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से 19 लाख नोटिस नाम और विवरण संबंधी विसंगतियों को लेकर थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सारथी विहार में सुपर चेकिंग के तहत स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने भौतिक सत्यापन के साथ दस्तावेजों की पड़ताल की और स्थानीय मतदाताओं से संवाद किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बीएलओ और ईआरओ स्तर पर फॉर्म-7 का निस्तारण नियमों के तहत किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि 3 अक्तूबर को अंतिम सूची जारी होने के बाद सभी लोग मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें।
More in Uttarakhand

हाथ में मां की तस्वीर लेकर ED दफ्तर पहुंचे पूर्व CM हरीश रावत: बोले— 'चुनाव से पहले शुरू हो जाता है एजेंसियों का खेल'; ओएसडी पर लगे आरोपों पर भाजपा को घेरा
9/26/2026
उत्तराखंड में मानसून फिर एक्टिव, 28 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से बढ़ी ठंड; देहरादून-नैनीताल समेत कई जिलों में रेड अलर्ट जारी
9/26/2026
रुड़की दोहरा हत्याकांड: बहन के प्रेम प्रसंग से नाराज भाई ने पार की हैवानियत की हदें, पड़ोसी युवक और बहन की गोली मारकर हत्या
9/26/2026
उत्तराखंड में महा-रिकॉर्ड: 2 लाख लोगों ने एक साथ गाया 'वंदे मातरम'
9/25/2026
