ज्योलिकोट में दूषित पानी से मौत के बाद बदलेगी उत्तराखंड की पेयजल निगरानी व्यवस्था, GIS मैपिंग से होगी पूरे नेटवर्क की निगरानी

देहरादून: नैनीताल जिले के ज्योलिकोट में दूषित पेयजल से मौत की घटना के बाद उत्तराखंड सरकार ने पेयजल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब प्रदेश की प्रमुख पेयजल योजनाओं में केवल जल स्रोत या स्टोरेज टैंक की जांच तक निगरानी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पूरे पेयजल नेटवर्क की निगरानी की जाएगी।
इसके तहत प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और GIS जियो-रेफरेंसिंग कराई जाएगी। अगले 15 दिनों में इन योजनाओं का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। इस दौरान पेयजल स्रोत, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, दोनों के क्रॉसिंग प्वाइंट, लीकेज और पुराने पाइपों की स्थिति की जांच की जाएगी।
पूरे पेयजल नेटवर्क की होगी जियो मैपिंग
नई व्यवस्था में प्रदेश की प्रमुख पेयजल योजनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें पानी के स्रोत से लेकर स्टोरेज टैंक और वितरण लाइन के जरिए उपभोक्ता तक पहुंचने वाले पूरे नेटवर्क को मैप किया जाएगा।
खास तौर पर उन स्थानों को चिन्हित किया जाएगा, जहां पेयजल और सीवर लाइन एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं। ऐसे स्थानों पर लीकेज या पाइपलाइन की खराब स्थिति के कारण दूषित पानी पेयजल लाइन में मिलने का खतरा रहता है।
पुरानी या क्षतिग्रस्त पाइपलाइन मिलने पर उसके रिप्लेसमेंट और जरूरी तकनीकी सुधार की कार्रवाई की जाएगी।
15 दिनों में होगा भौतिक सत्यापन
प्रमुख पेयजल योजनाओं का अगले 15 दिनों में मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसमें विभागीय रिकॉर्ड के साथ जमीनी स्थिति का मिलान किया जाएगा।
जांच के दौरान स्रोत, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता छोर तक संभावित लीकेज की स्थिति देखी जाएगी। साथ ही स्टोरेज टैंकों की सफाई की तारीख, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता और इस्तेमाल की भी जांच होगी।
पानी में कोलीफॉर्म समेत अन्य जरूरी मानकों की जांच को भी नियमित किए जाने की तैयारी है।
प्रमुख शहरों में UKPCB करेगा पानी की टेस्टिंग
पेयजल गुणवत्ता की जांच में उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल क्वालिटी टेस्टिंग कराई जाएगी।
इसके साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की सरप्राइज जांच भी की जाएगी। इसका उद्देश्य पेयजल और सीवरेज नेटवर्क से जुड़े संभावित जोखिमों की एक साथ निगरानी करना है।
दूषित पानी की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी
नई व्यवस्था में पानी की गुणवत्ता के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की भी निगरानी की जाएगी। किसी क्षेत्र में दूषित पेयजल की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल मौके पर भेजी जाएगी।
CMO और CMS स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को सक्रिय रखने के साथ डॉक्टरों की टीम को भी ऐसे मामलों में तत्काल प्रतिक्रिया के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस और जांच कराने की बात कही गई है।
स्थायी सर्विलांस सिस्टम होगा तैयार
ज्योलिकोट की घटना के बाद प्रस्तावित बदलाव को केवल एक बार की जांच तक सीमित नहीं रखा जाएगा। पेयजल व्यवस्था के लिए स्थायी सर्विलांस मैकेनिज्म विकसित किया जाएगा।
इसके तहत फील्ड में मौजूद शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर और अन्य कर्मचारियों के नेटवर्क का इस्तेमाल पेयजल गुणवत्ता या उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम की शुरुआती सूचना हासिल करने के लिए किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि राज्यभर में दूषित पेयजल की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और सभी संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब पेयजल की गुणवत्ता का आकलन केवल स्रोत या टैंक के पानी से नहीं, बल्कि पानी के पूरे सफर—स्रोत से उपभोक्ता तक—की निगरानी के आधार पर करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
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