उत्तराखंड हाईकोर्ट: जस्टिस सुभाष उपाध्याय बनेंगे स्थायी जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी मंजूरी

- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में लिया गया अहम फैसला
- अल्मोड़ा के मूल निवासी हैं जस्टिस सुभाष उपाध्याय, मई 2025 में बने थे अतिरिक्त जज
- कॉलेजियम की संस्तुति के बाद स्थायी न्यायाधीश बनने का रास्ता हुआ साफ
नैनीताल: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोजित कॉलेजियम की बैठक में उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge) जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judge) नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इस संस्तुति के बाद अब केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
न्यायिक प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कदम
वर्तमान में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर सेवाएं दे रहे जस्टिस सुभाष उपाध्याय को कॉलेजियम की हरी झंडी मिलने के बाद अब उनके स्थायी जज के रूप में पदभार संभालने का रास्ता साफ हो गया है। इसे राज्य के न्यायिक प्रशासन को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अल्मोड़ा से नैनीताल हाईकोर्ट तक का सफर
मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की सल्ट तहसील के निवासी जस्टिस सुभाष उपाध्याय का जन्म 12 दिसंबर 1972 को हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहाँ से उन्होंने बी.एससी., एलएलबी और एमएसडब्ल्यू (MSW) की डिग्रियां हासिल कीं।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1998 में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबे समय तक प्रैक्टिस की। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद वे नैनीताल हाईकोर्ट में सिविल, संवैधानिक और सेवा (सर्विस) मामलों में पैरवी करने लगे। अपने सुदीर्घ कानूनी करियर के दौरान वे उत्तराखंड सरकार के मुख्य स्थायी वकील (Chief Standing Counsel) सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। इसके उपरांत 30 मई 2025 को उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि जस्टिस सुभाष उपाध्याय को उत्तराखंड हाईकोर्ट का जज बनाए जाने की प्रारंभिक संस्तुति उत्तराखंड हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा सितंबर 2022 में की गई थी। इसके उपरांत 12 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी उनके नाम पर मुहर लगाई थी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद मई 2025 में उन्होंने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला था, और अब कॉलेजियम ने उन्हें स्थायी जज बनाने की अंतिम सिफारिश भी कर दी है।
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