हल्द्वानी पार्षद राजेंद्र जीना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: सदस्यता रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक; पद हुआ बहाल

- नैनीताल जिला जज ने रद्द की थी सदस्यता, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और शिकायतकर्ता को जारी किया नोटिस
- नामांकन में कोविड काल के मुकदमों की जानकारी छिपाने का था आरोप, 6 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली/हल्द्वानी:
नैनीताल जिले के हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड नंबर-9 के पार्षद राजेंद्र जीना को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज नैनीताल के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत जीना की पार्षद सदस्यता रद्द कर सीट को रिक्त घोषित किया गया था। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद अब राजेंद्र जीना वार्ड नंबर-9 के पार्षद पद पर बने रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पामिडीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी, संबंधित नगर निकाय अधिकारियों और शिकायतकर्ता गिरीश नैनवाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली संभावित सुनवाई 6 नवंबर तय की गई है।
पूरा मामला क्या है?
हल्द्वानी नगर निगम चुनाव के दौरान वार्ड नंबर-9 से चुने गए पार्षद राजेंद्र जीना के खिलाफ पराजित/शिकायतकर्ता गिरीश नैनवाल ने याचिका दायर की थी। नैनवाल का आरोप था कि राजेंद्र जीना ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपने हलफनामे में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दर्ज आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाई थी। इसे गंभीर चुनावी अनियमितता और तथ्य छिपाना मानते हुए जिला जज नैनीताल ने 20 जून को फैसला सुनाते हुए राजेंद्र जीना की सदस्यता रद्द कर दी थी और वार्ड को रिक्त घोषित कर दिया था।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
- शिकायतकर्ता का दावा: नामांकन पत्र में मुकदमों की जानकारी छिपाना चुनाव नियमों का सीधा उल्लंघन है, इसलिए निर्वाचन शून्य घोषित होना चाहिए।
- पार्षद राजेंद्र जीना का पक्ष: राज्य सरकार ने पहले ही कोविड लॉकडाउन के दौरान दर्ज छोटे-मोटे मुकदमों को वापस लेने का शासनादेश जारी कर दिया था। इसके अलावा उन्हें किसी समन की औपचारिक जानकारी नहीं थी, जिस कारण हलफनामे में उनका जिक्र नहीं हो सका। इसे जानबूझकर तथ्य छिपाना नहीं माना जा सकता।
जिला जज के फैसले के खिलाफ जीना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से पूर्ण राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी, जहां से अब उन्हें स्टे मिल गया है।
हाईकोर्ट अपडेट: तकनीकी विश्वविद्यालय में डायरेक्टर पदों पर डेपुटेशन से भर्ती पर सवाल, AICTE से जवाब तलब
नैनीताल:
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वीर माधो सिंह भंडारी तकनीकी विश्वविद्यालय के पांचों परिसरों में डायरेक्टर के पदों को सीधी भर्ती के बजाय डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) से भरे जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
- हाईकोर्ट की दो टूक: मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) से कड़ा सवाल पूछा है— "जब नियमों के तहत इन पदों को सीधी भर्ती से भरने का स्पष्ट प्रावधान है, तो फिर इन्हें डेपुटेशन के जरिए क्यों भरा जा रहा है?"
- अगली तारीख: हाईकोर्ट ने AICTE को आगामी तिथि पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को तय की गई है।
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