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बदरीनाथ धाम: श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ 'माता मूर्ति महोत्सव'

By Alpana Dwivedi23 September 2026

AI News Reader

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बदरीनाथ धाम: श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ 'माता मूर्ति महोत्सव', माणा में हुआ माता और पुत्र का दिव्य मिलन
  • वामन द्वादशी के पावन पर्व पर सदियों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन
  • भगवान उद्धव जी की डोली लेकर माणा स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंचे रावल और श्रद्धालु
  • दिनभर विशेष पूजा-अर्चना के बाद शाम को बदरीनाथ मंदिर लौटी डोली, श्रद्धालुओं में रहा भारी उत्साह

चमोली/बदरीनाथ धाम: भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम में भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वादशी (वामन द्वादशी) के पावन अवसर पर पारंपरिक 'माता मूर्ति महोत्सव' पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर भगवान बदरी विशाल के प्रतिनिधि के रूप में भगवान उद्धव जी की डोली भारत के प्रथम गांव माणा स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंची, जहां माता और पुत्र के मिलन की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का विधि-विधान से निर्वहन किया गया।

पारंपरिक वेशभूषा में हुआ भगवान उद्धव जी का स्वागत

बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी (रावल) की अगुवाई में डिमरी पंचायत के पदाधिकारियों, बदरी-केदार मंदिर समिति से जुड़े कर्मियों तथा देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं का जत्था भगवान उद्धव जी की डोली लेकर पैदल यात्रा करते हुए माणा गांव पहुंचा। माणा पहुंचने पर गांव के महिला मंगल दल और स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधानों में लोकगीतों और वाद्य यंत्रों के साथ डोली का भव्य स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान उद्धव जी को आस्था के प्रतीक जौ की हरियाली (अंकुरित जौ) भेंट की। इसके बाद डोली माता मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराई गई।

दिनभर चला विशेष अनुष्ठान और महाभिषेक

माता मूर्ति मंदिर में पूरे दिन विशेष पूजा-अर्चना, महाभिषेक और महाभोग अर्पण की प्रक्रियाएं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चलीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता मूर्ति को भगवान नर और नारायण की पूज्य माता माना जाता है। बद्रिकाश्रम की पावन भूमि पर भगवान नर-नारायण द्वारा लोक कल्याण के लिए की गई कठिन तपस्या के चलते इस महोत्सव का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु इस पावन दिवस को मां और पुत्र के अलौकिक एवं वात्सल्यपूर्ण मिलन के पर्व के रूप में मनाते हैं।

दिनभर बंद रहे बदरी विशाल के कपाट, शाम को लौटी डोली

माता मूर्ति महोत्सव की परंपरा के अनुसार, इस पूरे आयोजन के दौरान बदरीनाथ धाम के मुख्य मंदिर के कपाट दिनभर आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहे। मंदिर से जुड़े सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माणा स्थित माता मूर्ति परिसर में ही संपन्न किए गए। शाम करीब तीन बजे, अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत भगवान उद्धव जी की डोली जयकारों के बीच वापस बदरीनाथ मंदिर परिसर पहुंची, जिसके बाद कपाट पुनः खोल दिए गए।

महोत्सव को लेकर सीमांत गांव माणा और बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों व स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उमंग और उत्साह देखने को मिला।