नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का समापन: नैनी झील में डोला विसर्जन के साथ मां नंदा-सुनंदा कैलाश विदा; छोलिया नृत्य और जयकारों से गूंजी सरोवर नगरी

- 19 सितंबर (अष्टमी) से शुरू हुए ऐतिहासिक महोत्सव के अंतिम दिन उमड़ा आस्था का सैलाब
- नयना देवी मंदिर से माल रोड और तल्लीताल होते हुए मल्लीताल पहुंची मां की भव्य शोभायात्रा
- विदाई के क्षणों में भावुक हुए श्रद्धालु, मां से मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली
नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल में पिछले पांच दिनों से चल रहा कुमाऊं की लोक-संस्कृति और आस्था का महापर्व 'नंदा देवी महोत्सव' बुधवार को मां नंदा-सुनंदा के भावुक विदाई और डोला विसर्जन के साथ संपन्न हो गया। अष्टमी के पावन अवसर पर 19 सितंबर से प्रारंभ हुए इस ऐतिहासिक मेले के अंतिम दिन नयना देवी मंदिर से मां की भव्य डोली नगर भ्रमण के लिए निकली। पारंपरिक छोलिया नृत्य, ढोल-नगाड़ों की गूंज और गगनभेदी जयकारों के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी आराध्य देवी को नम आंखों से ससुराल (कैलाश) के लिए विदा किया। देर शाम नैनी झील में पवित्र डोला विसर्जन के साथ इस महोत्सव का विधिवत समापन हुआ।
छोलिया नृत्य और कुमाऊंनी रंग में रंगी सरोवर नगरी
शोभायात्रा का शुभारंभ प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर परिसर से विधि-विधान व पूजा-अर्चना के बाद हुआ। जैसे ही मां नंदा-सुनंदा की डोली मंदिर परिसर से बाहर निकली, पूरा शहर 'जय मां नंदा-सुनंदा' के उद्घोष से गूंज उठा। शोभायात्रा में पारंपरिक परिधानों में सजे छोलिया नर्तकों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर शानदार प्रस्तुतियां देकर कुमाऊं की लोक-संस्कृति के अनुपम रंग बिखेरे।
मां की डोली नयना देवी मंदिर से प्रारंभ होकर माल रोड होते हुए तल्लीताल डांठ पहुंची और वहां से पुनः मल्लीताल की ओर रवाना हुई। रास्ते भर जगह-जगह स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने पुष्प वर्षा कर मां का आशीर्वाद लिया।
बेटी की तरह विदा हुईं मां, नम हो गईं श्रद्धालुओं की आंखें
कुमाऊं अंचल में मां नंदा और सुनंदा को केवल देवी ही नहीं, बल्कि ध्याण (मायके आई बेटी) के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महोत्सव के अंतिम दिन मायके आई मां को उनके ससुराल भगवान शिव के धाम कैलाश के लिए विदा किया जाता है। ठीक उसी तरह, जैसे किसी बेटी को मायके से विदा करते समय परिवार भावुक होता है, शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं—विशेषकर महिलाओं—की आंखों में मां की विदाई की भावुकता और छलछलाते आंसू साफ नजर आए।
नैनी झील में विसर्जन के साथ समापन
नगर भ्रमण के बाद देर शाम मां नंदा-सुनंदा की कदली वृक्ष से निर्मित मूर्तियों व डोले को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पवित्र नैनी झील में विसर्जित किया गया। डोला विसर्जन के साथ ही 19 सितंबर से चल रहे इस ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव का औपचारिक समापन हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नंदा-सुनंदा से नैनीताल सहित पूरे उत्तराखंड राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में पुलिस व प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था रही।


