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रामकथा भारत तक सीमित नहीं, पूरे एशिया में फैली है — कोच्चि में बोले रक्षा मंत्री

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom18 September 2026

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रामकथा भारत तक सीमित नहीं, पूरे एशिया में फैली है — कोच्चि में बोले रक्षा मंत्री

कोच्चि। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भगवान राम की कथा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे एशिया में फैली हुई है। वे केरल के कोच्चि में आयोजित 'एक महाकाव्य, अनेक कथाएं: रामकथा सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रामकथा की उपस्थिति गाँवों और शहरों, दोनों जगह समान रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि रामायण लोगों के दैनिक जीवन और आध्यात्मिक आचरण में गहराई से रची-बसी है।

एक कथा, अनेक रूप

सम्मेलन का विषय ही इस बात की ओर संकेत करता है कि एक ही महाकाव्य अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं और भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग रूप लेता रहा है। भारत में ही रामकथा संस्कृत से लेकर तमिल, अवधी, बांग्ला, मराठी, ओड़िया और असमिया सहित अनेक भाषाओं में लिखी और गाई गई है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में भी रामकथा की अपनी परंपराएँ विकसित हुईं। इंडोनेशिया में 'ककविन रामायण', थाईलैंड में 'रामकियेन', कंबोडिया में 'रीमकेर' और लाओस में 'फ्रा लक फ्रा लाम' इसी कथा के स्थानीय रूप हैं। इन देशों में रामकथा नृत्य, छाया नाटक और मंदिर की भित्तियों पर उकेरी गई शिल्पकला के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है।

लोक परंपरा में जीवित कथा

रामकथा की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वह केवल ग्रंथों में बंद नहीं रही। लोकगीत, रामलीला, कठपुतली और चित्रकला के जरिये यह उन लोगों तक भी पहुँची जिन्होंने कभी मूल ग्रंथ नहीं पढ़ा। यही कारण है कि अलग-अलग क्षेत्रों में इसके पात्रों और प्रसंगों के अपने-अपने पाठ मिलते हैं।

सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि साझा सांस्कृतिक विरासत किस तरह देशों के बीच संवाद का माध्यम बनती है। रामकथा एशिया के कई देशों में ऐसी ही एक साझा कड़ी के रूप में मौजूद है, जो भाषा और सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ती है।