नंदा देवी बड़ी जात: रूपकुंड की ओर बढ़ीं देव डोलियां, वेदनी कुंड से वापस लौटी बधाण की डोली

- पड़ाव: 15वें पड़ाव पर पहुंची बड़ी जात, श्रद्धालुओं ने नम आंखों से डोलियों और चौसिंगा खाड़ू को किया विदा
- कठिन परीक्षा: शनिवार को रहस्यमयी रूपकुंड और ज्यूरागली पार कर शीला समुद्र पहुंचेगी यात्रा
- खाड़ू की विदाई: 20 सितंबर को होमकुंड में पूजा-अर्चना के बाद कैलाश के लिए विदा होगा चौसिंगा खाड़ू, बधाण की डोली वापस लौटी
थराली (चमोली)।
आस्था का अटूट विश्वास, मन में अगाध श्रद्धा और आंखों में मां नंदा के प्रति विदाई की भावुकता लिए नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने 15वें पड़ाव पातरनचौनिया और बगवाबासा पहुंच गई है। अनुकूल और खुशगवार मौसम के बीच शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने वेदनी बुग्याल में मां नंदा की पूजा-अर्चना की और नम आंखों व गगनभेदी जयकारों के साथ देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश के अगले पड़ावों के लिए विदा किया।
वेदनी कुंड में स्नान-तर्पण के बाद आगे बढ़ी यात्रा
बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा माता की देव डोलियों व चौसिंगा खाड़ुओं के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने शुक्रवार (18 सितंबर) को प्रसिद्ध वेदनी कुंड में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद कुंड किनारे स्थित नंदा देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद यात्रा 14वें पड़ाव बेदनी से विदा होकर 15वें और दूसरे निर्जन पड़ाव पातरनचौनिया व बगवाबासा के लिए रवाना हुई और देर शाम वहां पहुंच गई।
आज पार करेंगे ज्यूरागली, कल होमकुंड में होगी खाड़ू की विदाई
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद यात्रा में शामिल भक्तों का उत्साह चरम पर है:
- 19 सितंबर का रूट: शनिवार को यात्रा रहस्यमयी रूपकुंड से होते हुए यात्रा मार्ग के सबसे जोखिम भरे और कठिन दर्रे ‘ज्यूरागली’ की चढ़ाई करेगी। ज्यूरागली पार करने के बाद यात्रा 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी।
- 20 सितंबर का समापन पड़ाव: इसके बाद यात्रा अंतिम पड़ाव होमकुंड पहुंचेगी। 20 सितंबर को होमकुंड में विधि-विधान से विशेष महापूजा होगी। पूजा के उपरांत चौसिंगा खाड़ू (चार सींग वाले मेढ़े) को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। खाड़ू की विदाई के साथ ही बड़ी जात अपने पारंपरिक रास्तों से वापसी शुरू करेगी।
बधाण की नंदा डोली वेदनी से देवराड़ा के लिए वापस लौटी
इस वर्ष बड़ी जात यात्रा में तीन प्रमुख देव डोलियां शामिल हुई थीं। परंपरा के अनुसार, नंदा देवी राजराजेश्वरी बधाण की डोली वेदनी कुंड से अपनी वापसी यात्रा पर निकल चुकी है:
- शुक्रवार सुबह गौरोलीपातल से चलकर बधाण की डोली वेदनी बुग्याल पहुंची थी, जहां श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा कर अपने पितरों को तर्पण देकर मोक्ष की कामना की।
- दोपहर बाद डोली आली बुग्याल और दिदिना होते हुए देवाल ब्लॉक के बांक गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने उसका भव्य स्वागत किया।
- शनिवार को यह डोली लोहाजंग व बगड़ीगाड़ होते हुए रात्रि प्रवास के लिए ल्वाणी गांव पहुंचेगी और वहां से अपने मूल स्थान देवराड़ा लौटेगी।
5 सितंबर को कुरुड़ मंदिर से शुरू हुआ था सफर
बता दें कि इस ऐतिहासिक नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का शुभारंभ 5 सितंबर को चमोली जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से हुआ था। वर्तमान में बंड की नंदा देवी, दशोली की नंदा देवी और ज्वाल्पा माता की डोलियां चौसिंगा खाड़ू के साथ कैलाश की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं।
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