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राधा अष्टमी 19 सितंबर को, वृषभानु नंदिनी के प्राकट्य का पर्व

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom18 September 2026

AI News Reader

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राधा अष्टमी 19 सितंबर को, वृषभानु नंदिनी के प्राकट्य का पर्व

नई दिल्ली। राधा अष्टमी का पर्व इस वर्ष 19 सितंबर को मनाया जाएगा। यह तिथि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को पड़ती है। जन्माष्टमी के ठीक पंद्रह दिन बाद आने वाला यह पर्व ब्रज क्षेत्र में विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है।

पुराणों में राधा का स्वरूप

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा अनादि, अजन्मा और अयोनिजा हैं। इसका अर्थ है कि उनका कोई आरंभ नहीं है और उनका प्राकट्य सामान्य जन्म की प्रक्रिया से नहीं हुआ। इसी कारण राधा अष्टमी को जन्मोत्सव के बजाय प्राकट्य उत्सव कहा जाता है।

कथा के अनुसार राधा ब्रज में वृषभानु की पुत्री के रूप में प्रकट हुईं। उनकी माता कीर्ति के गर्भ से 'वायु' का प्रकटीकरण हुआ और योगमाया की प्रेरणा से राधा का प्राकट्य हुआ। यही कारण है कि उन्हें वृषभानु नंदिनी और कीर्ति कुमारी के नाम से भी पुकारा जाता है।

वृंदावन में हुआ था विवाह

पुराणों में वर्णन मिलता है कि वृंदावन में ब्रह्मा ने राधा और कृष्ण का विधिवत विवाह संपन्न कराया था। राधा को कृष्ण की आराध्य शक्ति माना गया है और इसी कारण उन्हें कृष्णवल्लभा कहा जाता है। भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण को अलग नहीं, बल्कि एक ही तत्व के दो स्वरूप माना जाता है।

इसी भाव के चलते ब्रज में कृष्ण का नाम लेने से पहले राधा का नाम लिया जाता है। मंदिरों में इस दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है और भक्त उपवास रखकर पूजा-अर्चना करते हैं।

बरसाना, वृंदावन और मथुरा सहित ब्रज के मंदिरों में इस अवसर पर दिनभर कीर्तन और भजन का क्रम चलता है। देश के अन्य हिस्सों में भी वैष्णव परंपरा से जुड़े मंदिरों में राधा अष्टमी पर विशेष आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुँचते हैं। कई स्थानों पर इस दिन भंडारे का भी आयोजन किया जाता है।

भाद्रपद का महीना वैसे भी पर्वों से भरा रहता है और जन्माष्टमी के बाद राधा अष्टमी इसी शृंखला की अगली कड़ी है। ब्रज में इन दोनों पर्वों को एक ही उत्सव के दो हिस्सों की तरह देखा जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की सजावट और तैयारियाँ कई मंदिरों में राधा अष्टमी तक बनी रहती हैं।