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एम्स दिल्ली में शुरू हुआ देश का पहला स्वदेशी एंडोस्कोपी सिस्टम, जोधपुर में हुआ है निर्माण

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom17 September 2026

AI News Reader

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एम्स दिल्ली में शुरू हुआ देश का पहला स्वदेशी एंडोस्कोपी सिस्टम, जोधपुर में हुआ है निर्माण

नई दिल्ली: चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश ने एक अहम पड़ाव पार किया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में देश के पहले स्वदेशी रूप से निर्मित एंडोस्कोपी सिस्टम से मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। यह सिस्टम राजस्थान के जोधपुर स्थित संयंत्र में तैयार किया गया है।

एंडोस्कोपी वह प्रक्रिया है जिसमें एक पतली, लचीली नली के सहारे शरीर के भीतर कैमरा पहुंचाकर अंगों की सीधी तस्वीर देखी जाती है। पेट, आंत, भोजन नली और श्वास नली से जुड़ी बीमारियों की पहचान में यह तकनीक निर्णायक मानी जाती है। नए सिस्टम में उन्नत इमेजिंग की सुविधा है, जिससे भीतरी सतह की बारीकियां अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं।

आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम

भारत में इस्तेमाल होने वाले उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरणों का बड़ा हिस्सा आज भी आयात किया जाता है। इससे न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि मरम्मत और कलपुर्जों के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। देश में ही ऐसे उपकरण बनने से अस्पतालों को रखरखाव में सुविधा मिलेगी और लंबी अवधि में जांच की लागत घटने की उम्मीद है।

एम्स दिल्ली देश का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है, जहां हर दिन देश के कोने-कोने से मरीज पहुंचते हैं। यहां एंडोस्कोपी की मांग लगातार बनी रहती है और प्रतीक्षा सूची लंबी रहती है। नई मशीन के जुड़ने से जांच की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों को अपनी बारी के लिए अपेक्षाकृत कम इंतजार करना पड़ेगा।

क्यों अहम है यह उपलब्धि

  • देश में बना पहला एंडोस्कोपी सिस्टम, निर्माण जोधपुर में
  • उन्नत इमेजिंग से जांच में अधिक स्पष्टता
  • आयातित उपकरणों पर निर्भरता घटने की उम्मीद
  • रखरखाव और कलपुर्जों की उपलब्धता देश में ही

चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि स्वदेशी उपकरण तभी सार्थक होते हैं जब उनकी गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर हो। एम्स जैसे संस्थान में इनका इस्तेमाल शुरू होना इस दिशा में भरोसे का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यहां उपकरणों को रोजाना कठिन परिस्थितियों में परखा जाता है।

अगर यह तकनीक सफल रहती है तो आने वाले समय में जिला स्तर के अस्पतालों तक ऐसी मशीनें पहुंच सकती हैं। इससे छोटे शहरों और कस्बों के मरीजों को जांच के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।