ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में क्या है अंतर? लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानें लक्षण, कारण और इलाज

नई दिल्ली: आमतौर पर माना जाता था कि उम्र बढ़ने के साथ आंखों से जुड़ी समस्याएं अधिक होती हैं, लेकिन आजकल कम उम्र के लोगों में भी आंखों की बीमारियां तेजी से देखने को मिल रही हैं। ग्लूकोमा और मोतियाबिंद ऐसी ही दो प्रमुख समस्याएं हैं, जो समय पर पहचान और इलाज न होने पर दृष्टि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि दोनों बीमारियों में धुंधली नजर जैसी कुछ समानताएं हो सकती हैं, लेकिन इनका असर आंख के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ता है। ग्लूकोमा मुख्य रूप से ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है, जबकि मोतियाबिंद आंख के लेंस को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं दोनों बीमारियों के लक्षण, कारण, जोखिम और इलाज के बारे में।
ग्लूकोमा क्या है?
ग्लूकोमा आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है जब उनकी दृष्टि काफी प्रभावित हो चुकी होती है।
ग्लूकोमा को अक्सर 'साइलेंट थीफ ऑफ साइट' कहा जाता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे देखने की क्षमता को कम कर सकता है और गंभीर स्थिति में स्थायी अंधापन भी हो सकता है।
ग्लूकोमा के संभावित कारण
ग्लूकोमा का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- आंखों के अंदर बढ़ा हुआ दबाव
- उम्र बढ़ना
- परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास
- हाई ब्लड प्रेशर
- डायबिटीज
- धूम्रपान
- आंख में चोट
- आंख के ड्रेनेज एंगल से जुड़ी समस्या
- लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल
- मायोपिया या हाइपरोपिया जैसी दृष्टि संबंधी समस्याएं
ग्लूकोमा के लक्षण
शुरुआती चरण में ग्लूकोमा के लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नजर नहीं आ सकते। बीमारी बढ़ने पर आसपास की दृष्टि प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
- धुंधली दृष्टि
- आंखों में तेज दर्द
- आंखों का लाल होना
- सिरदर्द
- जी मिचलाना या उल्टी
- रोशनी के आसपास हल्के दिखाई देना
अचानक तेज आंख दर्द, लाल आंख, धुंधली नजर और उल्टी जैसे लक्षण हों तो तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
मोतियाबिंद क्या है?
मोतियाबिंद में आंख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। इसके कारण व्यक्ति को साफ दिखाई देने में परेशानी हो सकती है। यह उम्र बढ़ने के साथ अधिक आम है, लेकिन कुछ अन्य कारणों से भी कम उम्र में मोतियाबिंद हो सकता है।
ग्लूकोमा के विपरीत, मोतियाबिंद का इलाज आमतौर पर सर्जरी के जरिए प्रभावी रूप से किया जा सकता है।
मोतियाबिंद के कारण
मोतियाबिंद के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
- बढ़ती उम्र
- डायबिटीज
- आंखों में चोट
- आंख के अंदर सूजन
- कुछ दवाइयों का लंबे समय तक इस्तेमाल
- आंखों में संक्रमण
- धूम्रपान
- कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
मोतियाबिंद के लक्षण
मोतियाबिंद बढ़ने पर व्यक्ति को निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
- धुंधली या धुंधली-सी नजर
- रात में देखने में परेशानी
- कम रोशनी में पढ़ने में कठिनाई
- तेज रोशनी या चकाचौंध से परेशानी
- गाड़ी चलाने में दिक्कत
- चीजें दो दिखाई देना
- आंख के लेंस में सफेदी या धुंधलापन
ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में बड़ा अंतर
दोनों बीमारियों में नजर कमजोर हो सकती है, लेकिन इनके बीच महत्वपूर्ण अंतर है। ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है और इससे हुई दृष्टि की क्षति स्थायी हो सकती है। वहीं, मोतियाबिंद आंख के लेंस को धुंधला करता है और उचित समय पर सर्जरी से दृष्टि में काफी सुधार संभव है।
इसलिए आंखों में किसी भी तरह का बदलाव महसूस होने पर खुद से इलाज करने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है।
किसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में ग्लूकोमा का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास, आंखों का बढ़ा हुआ दबाव, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों में चोट और लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
नियमित जांच है सबसे जरूरी
आंखों की कई बीमारियां शुरुआत में बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकती हैं। इसलिए नियमित नेत्र जांच बीमारी की जल्दी पहचान में मदद कर सकती है। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराने से दृष्टि को सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ जाती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य और शैक्षिक जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी लक्षण या आंखों से जुड़ी समस्या होने पर योग्य नेत्र चिकित्सक से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवा या उपचार को शुरू या बंद न करें।
