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राजाजी टाइगर रिजर्व में जल्द शुरू होगी पूरे दिन की सफारी, सूर्योदय से सूर्यास्त तक कर सकेंगे जंगल का दीदार

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom20 September 2026

AI News Reader

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राजाजी टाइगर रिजर्व में जल्द शुरू होगी पूरे दिन की सफारी, सूर्योदय से सूर्यास्त तक कर सकेंगे जंगल का दीदार

देहरादून। उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में घूमने आने वाले सैलानियों को जल्द ही पूरे दिन की सफारी का विकल्प मिल सकता है। रिजर्व प्रशासन इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है और इसे मंजूरी के लिए मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के पास भेजा जाएगा। फिलहाल प्रदेश के किसी भी संरक्षित क्षेत्र में इस तरह की व्यवस्था नहीं है।

प्रस्ताव के मुताबिक शुरुआत में चार गेटों से पूरे दिन की सफारी संचालित की जाएगी। इनमें चीला, मोतीचूर, चिलावाली और रानीपुर गेट शामिल हैं। हर गेट से सिर्फ दो वाहनों को अनुमति दी जाएगी, ताकि जंगल और वन्यजीवों पर दबाव न बढ़े। ये वाहन सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल के भीतर रह सकेंगे।

अभी चार-चार घंटे की दो पालियां

अभी राजाजी में सफारी दो पालियों में होती है और हर पाली करीब चार घंटे की होती है। सुबह की पाली पूरी होने पर वाहनों को बाहर लौटना पड़ता है और फिर शाम की पाली शुरू होती है। पूरे दिन की सफारी शुरू होने पर सैलानी बीच में बाहर आए बिना दिनभर जंगल में रह सकेंगे। इससे वन्यजीवों को नजदीक से देखने और उनकी तस्वीरें लेने का मौका कहीं ज्यादा मिलेगा।

इस सुविधा के लिए शुल्क सामान्य सफारी से अधिक रखा जाएगा, हालांकि दर अभी तय नहीं हुई है। व्यवस्था मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जहां पूरे दिन की सफारी पहले से लोकप्रिय है।

हर साल बढ़ रहे सैलानी

  • वर्ष 2022-23 में 6,58,613 पर्यटकों ने सफारी की
  • वर्ष 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 7,17,939 पर पहुंच गई
  • वर्ष 2024-25 में 8,08,324 सैलानी सफारी के लिए पहुंचे

राजाजी टाइगर रिजर्व की निदेशक कोको रोज ने बताया कि पूरे दिन की सफारी का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा जाएगा। कोशिश है कि अगले पर्यटन सत्र से यह सुविधा शुरू कर दी जाए।

पूरे दिन की सफारी शुरू होने से रिजर्व की आय तो बढ़ेगी ही, आसपास के गांवों में होमस्टे संचालकों, गाइड और वाहन चालकों को भी नया काम मिलेगा। वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह उत्तराखंड में अपनी तरह का पहला अनुभव होगा, जिसके लिए अब तक उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।