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हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही जीत का दावा करना मंत्री गणेश जोशी को पड़ा भारी, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom15 September 2026

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हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही जीत का दावा करना मंत्री गणेश जोशी को पड़ा भारी, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

नैनीताल.
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति मामले में एक नया मोड़ आ गया है। हाईकोर्ट का आधिकारिक आदेश आने से पहले ही 'फैसला अपने पक्ष में आने' का सार्वजनिक दावा करना मंत्री को भारी पड़ गया। मामले की सुनवाई कर रहे नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने पहले से सुरक्षित रखे गए फैसले को जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले को अब किसी दूसरी पीठ को रेफर करने के निर्देश दिए हैं।

फैसला आने से पहले ही बोले थे मंत्री— 'याचिका खारिज हो गई'

जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में इस मामले पर लंबी बहस के बाद 8 सितंबर को सुनवाई पूरी हो गई थी और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक होने से पहले ही 11 सितंबर को कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा कर दिया कि 'हाईकोर्ट में उनके खिलाफ चल रही याचिका खारिज हो चुकी है।'

अदालत के फैसले से पहले ही मंत्री द्वारा इस तरह का दावा किए जाने के बाद मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।

अदालत ने कहा— 'मौजूदा परिस्थितियों में फैसला देना उचित नहीं'

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 8 सितंबर को बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के चलते इस पीठ द्वारा अब निर्णय सुनाना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि इस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (CRLR/344/2025) को नई पीठ नामित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाए। अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा नई बेंच गठित किए जाने के बाद ही इस मामले में आगे की सुनवाई होगी।

क्या है पूरा मामला?

देहरादून निवासी विकेश नेगी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले वर्ष 2025 में देहरादून की विशेष न्यायाधीश विजिलेंस/अपर जिला जज की अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए नैनीताल हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।