किशाऊ बांध परियोजना पर आज बड़ा कदम: दिल्ली-उत्तराखंड समेत 6 राज्यों के बीच होगा MoU, दूर होगा बिजली और पानी का संकट

नई दिल्ली: ऊपरी यमुना बेसिन की महत्वाकांक्षी और बहुप्रतीक्षित 660 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना (Kishau Dam Project) को धरातल पर उतारने की दिशा में आज एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित होने जा रहा है। परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली स्थित ‘कर्तव्य भवन’ में दोपहर 12 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें उत्तराखंड सहित छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए सोमवार शाम ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।
6 राज्यों की सहमति से खुलेगा विकास का रास्ता
केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाले इस हस्ताक्षर समारोह में परियोजना के भागीदार छह राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि शामिल होंगे:
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- हरियाणा
- दिल्ली
- राजस्थान
लंबे समय से राज्यों के बीच पानी और लागत के बंटवारे को लेकर लंबित इस परियोजना पर सभी राज्यों की सहमति को क्षेत्र के जल एवं ऊर्जा प्रबंधन के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है।
किशाऊ बांध परियोजना: एक नजर में अहम आंकड़े
- अनुमानित लागत: करीब ₹15,000 करोड़
- बिजली उत्पादन क्षमता: 660 मेगावाट (MW)
- जल भंडारण क्षमता: लगभग 1,324 मिलियन घन मीटर (MCM)
- स्थान व नदी: टोंस नदी (यमुना की प्रमुख सहायक नदी), उत्तराखंड (देहरादून) और हिमाचल प्रदेश (सिरमौर) की सीमा पर।
बिजली ही नहीं, पेयजल और सिंचाई की भी बुझेगी प्यास
इस राष्ट्रीय परियोजना का उद्देश्य केवल 660 मेगावाट हरित जलविद्युत का उत्पादन करना ही नहीं है, बल्कि इसके बहुआयामी लाभ होंगे:
- पेयजल आपूर्ति: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को सालभर निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
- विशाल सिंचाई तंत्र: बांध के जल भंडारण से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलेगा।
- बाढ़ नियंत्रण: मानसूनी सीजन में टोंस और यमुना नदी के निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे को नियंत्रित करने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।
काम में आएगी अभूतपूर्व तेजी
छह राज्यों के बीच इस औपचारिक समझौते के बाद वर्षों से अटकी किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण और वित्तीय पोषण (Funding) से जुड़े कार्यों को तेज गति मिलेगी। केंद्र सरकार की ओर से परियोजना के जल घटक (Water Component) में 90 प्रतिशत तक केंद्रीय सहायता मिलने की व्यवस्था है, जिससे राज्यों पर वित्तीय भार भी कम होगा। आज होने वाले MoU के बाद भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण मंजूरियों और टेंडर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
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