अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को, जानिए अनंत सूत्र की चौदह गांठों का अर्थ

नई दिल्ली। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली अनंत चतुर्दशी इस बार 25 सितंबर को पड़ रही है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है और श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं।
किस स्वरूप की होती है पूजा
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के उस स्वरूप को समर्पित मानी जाती है, जिसका कोई अंत नहीं है। इसी भाव से इस तिथि का नाम अनंत पड़ा। इस दिन विधिवत पूजा के बाद एक पवित्र धागा धारण किया जाता है, जिसे अनंत सूत्र कहा जाता है।
किस भुजा पर बांधा जाता है सूत्र
परंपरा के अनुसार पुरुष अनंत सूत्र को दाहिनी भुजा में बांधते हैं, जबकि महिलाएं इसे बाईं भुजा पर बांधती हैं। यह धागा विष्णु पूजा पूरी होने के बाद ही धारण किया जाता है।
चौदह गांठों का भाव
अनंत सूत्र में चौदह गांठें लगाई जाती हैं। मान्यता है कि ये चौदह गांठें चौदह लोकों का प्रतीक हैं। इनमें सात ऊर्ध्व लोक और सात अधोलोक माने गए हैं। इस तरह यह साधारण सा दिखने वाला धागा सृष्टि की व्यापकता और उसके अनंत स्वरूप की याद दिलाता है।
गणेश उत्सव के आखिरी दिन पड़ने वाली इस तिथि पर देश के कई हिस्सों में विसर्जन शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच श्रद्धालु गणपति को विदा करते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं।
अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखने और विष्णु की पूजा करने की परंपरा देश के कई राज्यों में है। इस दिन घरों में पूजा स्थल सजाया जाता है और परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर पूजा में शामिल होते हैं।
पूजा का समय स्थान और पंचांग के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। इसलिए श्रद्धालु आमतौर पर स्थानीय पंचांग देखकर ही मुहूर्त तय करते हैं। तिथि के आरंभ और समाप्ति के समय को देखते हुए कई जगह पूजा सुबह और कई जगह दिन में की जाती है।
गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और इसका समापन अनंत चतुर्दशी पर होता है। इस बीच घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं की रोज पूजा-अर्चना होती है और आरती में मोहल्ले के लोग शामिल होते हैं।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में यह पर्व सामूहिक उत्सव का रूप ले लेता है। विसर्जन के दिन निकलने वाली शोभायात्राओं में हर उम्र के लोग शामिल होते हैं और यही इस पर्व की सबसे बड़ी पहचान बन जाती है।
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