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संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर लगेंगे सेंसर: सरस्वती ताल और केदारताल के विस्तृत अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम रवाना

8 September 2026

AI News Reader

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संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर लगेंगे सेंसर: सरस्वती ताल और केदारताल के विस्तृत अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम रवाना

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights):

  • उच्च हिमालयी झीलों का अध्ययन: चमोली स्थित सरस्वती ताल (5,700 मीटर) और उत्तरकाशी के केदारताल (4,750 मीटर) के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए विशेषज्ञ दल रवाना।
  • हरी झंडी: सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) से दल को हरी झंडी दिखाई।
  • 13 झीलें संवेदनशील: उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित; 4 का सर्वे पूरा, शेष का चरणबद्ध अध्ययन जारी।
  • आधुनिक तकनीक की तैनाती: संभावित बाढ़ (GLOF) के खतरों को भांपने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक यंत्र और संचार तंत्र स्थापित किए जाएंगे।

शीर्ष वैज्ञानिक संस्थान शामिल: वाडिया संस्थान, बीएसआईपी लखनऊ, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और निम (NIM) के वैज्ञानिक संयुक्त अभियान का हिस्सा।

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) से भविष्य में होने वाले संभावित खतरों और आपदा के जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा वैज्ञानिक कदम उठाया है। चमोली जनपद के सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जनपद के केदारताल के विस्तृत बैथीमेट्री (Bathymetry) और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का संयुक्त दल मंगलवार को देहरादून से रवाना हो गया।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) परिसर से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं।

समय रहते चेतावनी और सेंसर तंत्र होगा विकसित: CM धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण और अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि झीलों की वास्तविक स्थिति, जल भराव क्षमता, आकार में आने वाले बदलाव और आसपास के भू-भाग की स्थिरता का सटीक आकलन किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, "आपदा जोखिम को कम करने के लिए निचले क्षेत्रों (डाउनस्ट्रीम) तक समय रहते पूर्व चेतावनी पहुंचाना सबसे अहम है। इसके लिए झीलों पर आधुनिक सेंसर, ऑटोमैटिक जलस्तर मापक उपकरण और सैटेलाइट संचार प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव कदम उठाए जा सकें।"

वहीं, आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार झीलों से संभावित आपदा के खतरे को न्यूनतम करने के लिए सुरक्षात्मक उपायों पर काम कर रही है। संवेदनशील इलाकों की पहचान कर सुरक्षित निकासी मार्ग (Evacuation Routes), मजबूत संचार व्यवस्था और त्वरित राहत एवं बचाव तंत्र को तैयार किया जा रहा है।

13 में से 4 झीलों का सर्वे पूरा, अब दो सबसे ऊंची झीलों की बारी

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को उच्च संवेदनशीलता की श्रेणी में रखा गया है।

  • इनमें से 4 झीलों का सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
  • शेष झीलों का चरणबद्ध तरीके से अध्ययन किया जा रहा है।
  • वर्तमान अभियान में चमोली का सरस्वती ताल (लगभग 5,700 मीटर ऊंचाई) और उत्तरकाशी का केदारताल (लगभग 4,750 मीटर ऊंचाई) शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इतनी अत्यधिक ऊंचाई और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित इन झीलों का बैथीमेट्री (गहराई और जल क्षमता का मापन) सर्वेक्षण करना वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण लेकिन आवश्यक है। इससे यह पता चलेगा कि झीलों में कितना पानी है और उनके टूटने की स्थिति में निचले रिहायशी इलाकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

देश के शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञ अभियान में शामिल

इस बहुआयामी सर्वेक्षण दल में देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों और सुरक्षा बलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:

  • शामिल संस्थाएं: USDMA, ULMMC, बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH) रुड़की, SDRF, NDRF और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM)।
  • प्रमुख दल सदस्य: रोहित कुमार ও निखिल पुनिया (USDMA), डॉ. विशाल ও दीपक भट्ट (ULMMC), डॉ. शेख नवाज अली, शुभजीत घोष ও प्रकाश रंजन जेना (BSIP लखनऊ), डॉ. पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट ও शिव्यांक सिंह नेगी (वाडिया संस्थान) शामिल हैं।
  • इस अवसर पर राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (से.नि.), एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी और जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित आपदा प्रबंधन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।