उत्तराखंड: 5 गढ़वाल राइफल्स का माउंट भागीरथी-II अभियान शुरू; 12 सदस्यीय दल 10 अक्टूबर तक करेगा आरोहण

- 10 सितंबर से 10 अक्तूबर तक चलेगा सेना का यह साहसिक अभियान
- डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर शब्बरुल हसन ने आइस ऐक्स सौंपकर किया फ्लैग ऑफ
- डेढ़ माह की कड़ी ट्रेनिंग और विशेष अनुकूलन अभ्यास के बाद दल हुआ तैयार
देहरादून/उत्तरकाशी:
भारतीय सेना की 5 गढ़वाल राइफल्स के 12 जांबाज सैनिकों का एक विशेष दल उत्तरकाशी स्थित 'माउंट भागीरथी-द्वितीय' (माउंट भागीरथी-II) के चुनौतीपूर्ण अभियान पर रवाना हो गया है। 6,512 मीटर (लगभग 21,365 फीट) ऊंची इस दुर्गम बर्फीली चोटी को फतह करने के लिए यह पर्वतारोहण अभियान 10 सितंबर से 10 अक्तूबर तक संचालित किया जाएगा।
प्रतीकात्मक 'आइस ऐक्स' सौंपकर किया फ्लैग ऑफ
इस साहसिक अभियान को डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (डिप्टी जीओसी), ब्रिगेडियर शब्बरुल हसन ने औपचारिक रूप से हरी झंडी (फ्लैग ऑफ) दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर ब्रिगेडियर हसन ने अभियान दल के लीडर और डिप्टी लीडर को पारंपरिक प्रतीकात्मक 'आइस ऐक्स' (बर्फ काटने की कुल्हाड़ी) सौंपी और सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित व सफल अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं।
डेढ़ महीने तक ली कठिन ट्रेनिंग
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, हाड़ कंपा देने वाली ठंड और अप्रत्याशित मौसम जैसी विषम परिस्थितियों से पार पाने के लिए दल ने पिछले डेढ़ माह से लगातार कठोर शारीरिक प्रशिक्षण और उच्च पर्वतारोहण का कड़ा अभ्यास किया है।
अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High Altitude) में शरीर को मौसम और दबाव के अनुकूल ढालने के लिए जवानों को विशेष अनुकूलन (Acclimatization) प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे खड़ी चट्टानों, ग्लेशियरों और भारी बर्फबारी के बीच सुरक्षित आगे बढ़ सकें।
बेहद चुनौतीपूर्ण है माउंट भागीरथी-II
गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री समूह में स्थित माउंट भागीरथी-II अपनी खड़ी ढलानों, तीखी चट्टानी दीवारों और खतरनाक हिमनदों के कारण दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। भारतीय सेना का यह अभियान न केवल जवानों के अदम्य साहस और शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा है, बल्कि यह सेना के पर्वतारोहण कौशल और साहसिक भावना का भी प्रतीक है।
